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मिथिलांचल, कोसी और तिरहुत में रिकॉर्डतोड़ मतदान: 2025 बिहार चुनाव का नया इतिहास

On: November 8, 2025 5:52 AM
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मिथिलांचल मतदान 2025

मिथिलांचल मतदान 2025 : 2025 बिहार चुनाव में मिथिलांचल, कोसी और तिरहुत में रिकॉर्डतोड़ मतदान ने चुनावी इतिहास रचा। इन क्षेत्रों में भारी चुनावी उत्साह ने राजनीतिक समीकरणों को नया आकार दिया।

भारी मतदान ने बढ़ाई राजनीतिक उत्सुकता

मिथिलांचल, कोसी और तिरहुत क्षेत्र में इस बार इतनी भारी मतदान दर ने चुनाव के रुझानों को प्रभावित किया है। मुजफ्फरपुर में सर्वाधिक 71.41% मतदान दर्ज हुआ, जबकि समस्तीपुर में 71.74% वोटिंग हुई। दूसरी ओर, पटना में यह संख्या 58.40% रही, जो अपेक्षाकृत कम है। केवल यही नहीं, बल्कि बेगूसराय, गोपालगंज, खगड़िया, मधेपुरा, सहरसा और वैशाली जैसे कई जिलों में भी 65% से अधिक मतदान हुआ, जो इस क्षेत्र की जीवंत राजनीतिक भागीदारी को बताता है।

उत्तर बिहार का चुनावी नखारा

बिहार की कुल 243 विधानसभा सीटों में 153 सीटें उत्तर बिहार में आती हैं। चुनाव में उत्तर बिहार के 11 जिलों में मतदान हुआ, जिन इलाकों में पिछले चुनावों में एनडीए की अच्छी पकड़ रही है। इन जिलों में भारी मतदान दर ने राजनीतिक दलों के बीच सघन प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है।

एनडीए और महागठबंधन की कड़ी टक्कर

पहले चरण में मतदान के दौरान राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर नजर रखे हुए थे कि कौन सा गठबंधन ज्यादा मजबूत है। पिछले चुनाव 2020 में एनडीए ने उत्तर बिहार में बढ़त हासिल की थी जबकि महागठबंधन ने महत्त्वपूर्ण सीटें जीती थीं। इस बार भी जदयू ने 57 सीटों पर उम्मीदवार उतारे जबकि भाजपा ने 48 सीटों पर डेरा डाला। इसके मुकाबले में राजद ने 73 सीटों पर प्रत्याशी उतारे, वहीं कांग्रेस, भाकपा माले और अन्य दलों ने भी मुकाबला कायम रखा।

मतदान के असर और राजनीति के मायने

भारी मतदान ने इस बार बिहार की राजनीतिक परिदृश्य को गतिशील बना दिया है।

एनडीए इसे जनसमर्थन की जीत के रूप में देख रहा है,

वहीं विपक्ष इसे बदलाव की लहर मान रहा है।

मतदाताओं की बढ़ती सक्रियता से यह साफ़ होता है कि

बिहार की जनता अपने फैसले को लेकर जागरूक है

और लोकतंत्र में अपनी भूमिका निभा रही है।

निष्कर्ष

मिथिलांचल, कोसी और तिरहुत में रिकॉर्डतोड़ मतदान

ने न केवल राज्य के राजनीतिक समीकरण बदले हैं,

बल्कि यह बिहार में लोकतंत्र की मजबूती और

जनता की राजनीतिक भागीदारी का अहम संकेत

भी है। आगामी चरणों के परिणाम इस बात की पुष्टि

करेंगे कि इस बढ़े हुए मतदान का प्रभाव किस

दिशा में जाएगा और बिहार की राजनीति में कौन सी नई लहरें आएंगी।

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