दिलीप घोष मंत्री : पश्चिम बंगाल में राजनीतिक इतिहास बदल गया है। देश की आजादी के बाद पहली बार भाजपा की सरकार बनी है और शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। इस नई सरकार में सबसे चर्चित नामों में शामिल हैं दिलीप घोष। आरएसएस के प्रचारक से लेकर बंगाल भाजपा के अध्यक्ष और अब मंत्री बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है।
दिलीप घोष ने खड़गपुर सदर सीट से जीत हासिल की और शपथ ग्रहण समारोह में मंत्री पद की शपथ ली। आइए जानते हैं कौन हैं दिलीप घोष, उनका राजनीतिक सफर और बंगाल में भाजपा की सफलता में उनकी भूमिका।

दिलीप घोष का जन्म और प्रारंभिक जीवन
#दिलीप घोष का जन्म 1 अगस्त 1964 को पश्चिम मेदिनीपुर जिले के कुलियाना गांव में हुआ था। वे एक किसान परिवार से आते हैं। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने झारग्राम के पॉलिटेक्निक कॉलेज से इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया।
राजनीति में आने से पहले दिलीप घोष लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे। 1984 में मात्र 19-20 साल की उम्र में वे आरएसएस के प्रचारक बन गए। 1999 से 2007 तक वे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के प्रभारी रहे। इस दौरान वे पूर्व आरएसएस प्रमुख केएस सुदर्शन के सहायक भी रहे।
आरएसएस से भाजपा में प्रवेश
- 2014 में दिलीप घोष ने आरएसएस से भाजपा में प्रवेश किया।
- उन्हें बंगाल भाजपा का महासचिव बनाया गया। मात्र एक साल बाद 2015 में
- उन्हें पश्चिम बंगाल भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। वे दो बार इस पद पर रह चुके हैं।
उनके नेतृत्व में भाजपा ने बंगाल में जबरदस्त उछाल भरा:
- 2019 लोकसभा चुनाव: भाजपा ने 18 सीटें जीतीं (पहले सिर्फ 2 थीं)।
- 2021 विधानसभा चुनाव: 77 सीटें जीतकर प्रमुख विपक्षी दल बनी।
- पार्टी का वोट शेयर 10% से बढ़कर लगभग 40% तक पहुंच गया।
दिलीप घोष को भाजपा का फायरब्रांड नेता माना जाता है। उन्होंने जंगलमहल, उत्तर बंगाल और आदिवासी इलाकों में पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत की। संगठन को बूथ स्तर तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही।
दिलीप घोष मंत्री की उपलब्धियां और शैली
- #दिलीप घोष को नारू दा के नाम से भी जाना जाता है। वे सादगी और आक्रामक
- अंदाज के लिए प्रसिद्ध हैं। बंगाल में भाजपा को मुख्यधारा की पार्टी बनाने वाले नेताओं में वे प्रमुख हैं।
- 2024 में वे मेदिनीपुर लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। हालिया विधानसभा चुनाव में खड़गपुर
- सदर से उन्होंने सात बार के विधायक ज्ञान सिंह सोहनपाल को हराया। अब शुभेंदु
- अधिकारी सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया है, जो उनकी लंबे संघर्ष और योगदान का परिणाम है।
संपत्ति: चुनावी हलफनामे के अनुसार दिलीप घोष और उनके परिवार की कुल संपत्ति लगभग 3.07 करोड़ रुपये है। इसमें 56.74 लाख रुपये चल संपत्ति और 2.55 करोड़ रुपये अचल संपत्ति शामिल है।
शपथ ग्रहण समारोह और ऐतिहासिक पल
- 9 मई 2026 को शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस मौके पर
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और 20 भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद रहे।
- समारोह में पीएम मोदी ने रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि दी और 98 वर्षीय भाजपा
- कार्यकर्ता माखनलाल सरकार के पैर छुए। दिलीप घोष समेत पांच अन्य नेताओं
- ने मंत्री पद की शपथ ली। यह बंगाल के लिए नया अध्याय है।
बंगाल राजनीति में दिलीप घोष का महत्व
दिलीप घोष ने बंगाल में भाजपा को सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रहने दिया। उन्होंने ग्रामीण, आदिवासी और पिछड़े इलाकों में काम किया। उनकी मेहनत से पार्टी का संगठन मजबूत हुआ।
- वे हमेशा हिंदुत्व, विकास और बंगाल की पहचान को आगे बढ़ाने की बात करते हैं।
- उनकी सादगी और जमीनी जुड़ाव उन्हें आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाते हैं।
- दिलीप घोष की कहानी साबित करती है कि समर्पण, अनुशासन और जमीनी काम से कोई
- भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। आरएसएस प्रचारक से मंत्री
- बनने तक का उनका सफर युवा कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा है।
बंगाल में पहली भाजपा सरकार के गठन के साथ दिलीप घोष जैसे नेताओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। अब देखना होगा कि नई सरकार बंगाल को किस दिशा में ले जाती है।







