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EWS कोटा BHU विवाद UGC के आदेश पर BHU में 2 छात्रों को मिला PhD प्रवेश 9 महीने इंतजार और 21 दिन धरने के बाद मिली राहत!

On: January 9, 2026 9:35 AM
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EWS कोटा BHU विवाद

EWS कोटा BHU विवाद : बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में पिछले शैक्षणिक सत्र के PhD प्रवेश विवाद ने आखिरकार राहत की सांस ली है। यूजीसी (UGC) के सख्त आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो छात्रों को प्रवेश दे दिया है। हिंदी विभाग से जुड़े भास्करादित्य त्रिपाठी और अर्चिता सिंह के मामले में करीब 9 महीने तक चले इंतजार और कुलपति आवास के बाहर 21 दिनों के धरने के बाद न्याय मिला है। इसके अलावा शिक्षा संकाय की एक छात्रा को भी इंटरव्यू के लिए सूचना भेजी गई है।

यह मामला EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) कोटा की सीट को लेकर शुरू हुआ था, जिसने BHU कैंपस में व्यापक विरोध-प्रदर्शन को जन्म दिया। यूजीसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की और रिपोर्ट के आधार पर प्रवेश का रास्ता साफ किया।

EWS कोटा BHU विवाद विवाद की पूरी कहानी EWS प्रमाणपत्र से शुरू हुआ झगड़ा

पिछले सत्र में BHU PhD एडमिशन के दौरान हिंदी विभाग में EWS कैटेगरी की सीट पर विवाद खड़ा हो गया। वेटिंग लिस्ट में पहले नंबर पर अर्चिता सिंह थीं, लेकिन उन्होंने बिना EWS प्रमाणपत्र के आवेदन कर दिया था। विभाग ने अंतिम समय में उनसे अंडरटेकिंग तो ले ली, लेकिन बाद में प्रवेश लिंक रोक दिया गया।

EWS कोटा BHU विवाद
EWS कोटा BHU विवाद

इसके बाद वेटिंग में अगले अभ्यर्थी भास्करादित्य त्रिपाठी को लिंक भेजा जाना था, जिनके पास वैध EWS प्रमाणपत्र था। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही से लिंक नहीं भेजा गया, जिससे दोनों छात्रों ने कैंपस में धरना शुरू कर दिया। भास्करादित्य ने तो कुलपति आवास के बाहर 21 दिन तक धरना दिया। यह प्रकरण मीडिया और शैक्षणिक जगत में काफी चर्चा में रहा।

  • भास्करादित्य त्रिपाठी ने कहा, “EWS प्रमाणपत्र होने के बावजूद मुझे प्रवेश से वंचित रखा गया।
  • न्याय की लड़ाई में 21 दिन धरना देना पड़ा।” छात्र नेता डॉ. मृत्युंजय तिवारी ने मांग की
  • कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

UGC की भूमिका: जांच समिति से सख्त कार्रवाई

मामले की शिकायत मिलने पर यूजीसी ने तुरंत एक्शन लिया। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई गई। समिति ने पूरे प्रकरण की जांच की और रिपोर्ट सौंपी। यूजीसी ने BHU प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए प्रवेश देने के आदेश दिए।

  • यूजीसी के इस हस्तक्षेप से न केवल भास्करादित्य त्रिपाठी को हिंदी विभाग में PhD प्रवेश मिला
  • बल्कि शिक्षा संकाय की छात्रा को भी इंटरव्यू का मौका दिया गया। विश्वविद्यालय ने फीस
  • जमा करने का लिंक भेज दिया है। 16 जनवरी 2026 के बाद एक दिन के लिए ऑनलाइन फीस
  • काउंटर खोला जाएगा, उसके बाद नामांकन पूरा होगा।

BHU प्रवेश प्रक्रिया पर उठे सवाल

यह मामला विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। EWS कोटा, वेटिंग लिस्ट और प्रमाणपत्र सत्यापन में देरी से छात्रों को महीनों इंतजार करना पड़ता है। छात्रों और शिक्षाविदों में संतोष है कि यूजीसी जैसे नियामक संस्थान ने समय पर हस्तक्षेप किया।

  • अगर आप BHU PhD एडमिशन 2026 की तैयारी कर रहे हैं, तो EWS या अन्य कोटा के
  • लिए सभी दस्तावेज पहले से तैयार रखें। यूजीसी गाइडलाइंस का पालन करें, ताकि ऐसे विवादों से बचा जा सके।

छात्रों की जीत, लेकिन सबक भी

  • 9 महीने की लड़ाई के बाद भास्करादित्य त्रिपाठी और अन्य छात्रों को प्रवेश मिलना न्याय की जीत है।
  • यह घटना BHU जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में प्रशासनिक सुधार की जरूरत भी दर्शाती है।
  • यूजीसी का सख्त रुख अन्य विश्वविद्यालयों के लिए मिसाल बनेगा।
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