UN Security Council Politics UN में पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है क्योंकि पहली बार एक नया देश सुरक्षा परिषद में शामिल हुआ है। यह बदलाव वैश्विक राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है और अगले दो साल तक अंतरराष्ट्रीय फैसलों में इस देश की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) विश्व शांति और सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण मंच है। यहां पांच स्थायी सदस्यों (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) के साथ दस अस्थायी सदस्य दो-दो साल के लिए चुने जाते हैं। जून 2024 में हुए चुनाव में पाकिस्तान सहित कुछ देशों को 2025-2026 की अवधि के लिए चुना गया। लेकिन भारतीय दृष्टिकोण से देखें तो पाकिस्तान की कई चालें फेल हो चुकी हैं। इस बीच कुछ देश पहली बार इस मंच पर पहुंचे हैं, जो वैश्विक राजनय में नया समीकरण बना रहे हैं।
इस ब्लॉग पोस्ट में हम विस्तार से समझेंगे कि पाकिस्तान की रणनीति क्यों फेल हुई, कौन सा देश पहली बार पहुंचा और अगले दो साल में UNSC में क्या बड़ा ‘खेल’ होने वाला है।
UN Security Council Politics: पाकिस्तान की UNSC सदस्यता
पाकिस्तान को 2025-2026 के लिए UNSC का अस्थायी सदस्य चुना गया है। यह उसकी आठवीं बार है, लेकिन इस बार की तैयारी में उसकी कई कोशिशें नाकाम रहीं। पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की कोशिश करता रहा है। मई-जून 2024 के आसपास उसने OIC (Organisation of Islamic Cooperation) देशों के साथ मिलकर भारत के खिलाफ प्रस्ताव लाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
भारत की मजबूत कूटनीति और UN में बढ़ते प्रभाव के कारण पाकिस्तान की ये चालें फेल हो गईं। पाकिस्तान ने उम्मीद की थी कि वह सुरक्षा परिषद में भारत को घेर सकेगा, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में उसे भारी समर्थन तो मिला (182 वोट), पर असली चुनौती सदस्यता के दौरान आएगी। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट में है, आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता है और आतंकवाद से जुड़ी उसकी छवि विश्व स्तर पर खराब है। ऐसे में UNSC में उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाजमी है।
पहली बार पहुंचा देश
2025-2026 या आसपास के चुनावों में कुछ देश ऐसे हैं जो पहली बार या लंबे अंतराल के बाद UNSC पहुंचे। उदाहरण के तौर पर, सोमालिया या ग्रीस जैसे देशों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन खास तौर पर कुछ अफ्रीकी और यूरोपीय देशों की एंट्री ने ध्यान खींचा।
डेनमार्क, ग्रीस, पाकिस्तान, पनामा और सोमालिया 2025-2026 के लिए चुने गए। इनमें से कुछ देशों के लिए यह महत्वपूर्ण अवसर है। सोमालिया जैसे देश, जो आतंकवाद और अस्थिरता से जूझ रहे हैं, पहली बार या लंबे समय बाद इस मंच पर पहुंचकर अपनी समस्याएं रखेंगे। इन देशों की एंट्री से UNSC में विकासशील देशों की आवाज मजबूत होने की उम्मीद है, लेकिन पाकिस्तान की मौजूदगी इसे जटिल बना सकती है।
ये नए सदस्य अब 2 साल तक सुरक्षा परिषद में बड़े फैसलों में हिस्सा लेंगे – चाहे वो गाजा संकट हो, यूक्रेन युद्ध हो या फिर आतंकवाद पर चर्चा।
पाकिस्तान का ‘बड़ा खेल’
अगले दो साल (2025-2026) पाकिस्तान UNSC में अपना ‘खेल’ खेलने की कोशिश करेगा। उसकी मुख्य रणनीतियां निम्नलिखित हो सकती हैं:
- कश्मीर मुद्दे का राजनीतिकरण: पाकिस्तान हर मौके पर कश्मीर को उठाएगा। लेकिन भारत की ‘सार्वभौमिकता और अखंडता’ पर अडिग नीति और UNSC में स्थायी सदस्यों का समर्थन इसे सीमित रखेगा।
- इस्लामी देशों का ब्लॉक: OIC के जरिए वह मुस्लिम देशों को एकजुट कर भारत विरोधी प्रस्ताव लाने की कोशिश करेगा।
- चीन का सहारा: चीन के साथ उसके गहरे संबंध UNSC में वीटो पावर का इस्तेमाल करा सकते हैं। CPEC और तालिबान समर्थन जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान चीन की छत्रछाया में काम करेगा।
- आतंकवाद पर दोहरा मापदंड: पाकिस्तान खुद आतंकवाद का शिकार बताएगा, लेकिन भारत पर आरोप लगाएगा। FATF से बचने के बाद भी उसकी छवि संदिग्ध बनी हुई है।
भारत की कूटनीति इन चालों का मुकाबला करने के लिए तैयार है। भारत UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है और उसकी G20 अध्यक्षता तथा QUAD जैसी साझेदारियां मजबूत हैं।
UNSC की वर्तमान स्थिति और चुनौतियां
UNSC में सुधार की मांग लंबे समय से है। G4 देश (भारत, जापान, जर्मनी, ब्राजील) स्थायी सदस्यता चाहते हैं। अफ्रीकी संघ भी दो स्थायी सीटों की मांग कर रहा है। पाकिस्तान जैसे देश सुधार का विरोध करते हैं क्योंकि इससे उनकी रणनीति प्रभावित होती है।
2025-2026 में UNSC के एजेंडे में मध्य पूर्व, यूक्रेन, अफ्रीका के संघर्ष और जलवायु सुरक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। पाकिस्तान इनमें अपना योगदान देने की बजाय विघ्न डालने की कोशिश कर सकता है।
भारत की मजबूत स्थिति
भारत ने UN में अपनी कूटनीति को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
- Voice of Global South समिट
- अफ्रीका के साथ बढ़ते संबंध
- आतंकवाद विरोधी अभियान
ये सब भारत को मजबूत बनाते हैं। पाकिस्तान की चाल फेल होने का एक कारण भारत की आर्थिक प्रगति और सैन्य क्षमता भी है। UNSC में भारत की भागीदारी बढ़ रही है और भविष्य में स्थायी सदस्यता की संभावना प्रबल है।
निष्कर्ष
UN Security Council Politics पाकिस्तान की UNSC में चाल फेल हुई है, लेकिन वह अब 2 साल तक ‘बड़ा खेल’ खेलने की तैयारी में है। नए सदस्यों की एंट्री से मंच विविध हुआ है, पर चुनौतियां भी बढ़ी हैं। भारत को सतर्क कूटनीति से इन मुद्दों का सामना करना होगा।
UNSC विश्व शांति का प्रहरी है। अगर पाकिस्तान जैसे देश अपनी सकारात्मक भूमिका निभाएं तो अच्छा, अन्यथा उनकी चालें खुद उनके लिए मुसीबत बन सकती हैं।





