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JMM की एक राज्यसभा सीट तय, कांग्रेस के लिए बढ़ी मुश्किलें—झारखंड में नया सियासी गणित

On: June 3, 2026 4:59 AM
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Jharkhand Rajya Sabha Politics

Jharkhand Rajya Sabha Politics झारखंड की राजनीति में राज्यसभा सीट को लेकर नया समीकरण बन गया है। JMM की एक सीट तय मानी जा रही है, जबकि कांग्रेस के लिए चुनौती बढ़ गई है। जानें पूरा राजनीतिक गणित और संभावित असर।

Jharkhand Rajya Sabha Politics

झारखंड की राजनीति हमेशा से गठबंधनों, क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं और शक्ति संतुलन का खेल रही है। हाल ही में राज्यसभा चुनाव को लेकर जो घटनाक्रम सामने आए हैं, वे न केवल महागठबंधन के अंदरूनी तनाव को उजागर कर रहे हैं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी नए समीकरण बना रहे हैं। JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा) की एक राज्यसभा सीट तय होने की खबर ने कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 18 जून 2026 को होने वाले चुनाव में दो सीटें दांव पर हैं, लेकिन गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे पर विवाद गहरा गया है।

यह स्थिति महज दो सीटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि झारखंड में कांग्रेस की साख, JMM की प्रमुखता और BJP की रणनीति का मिश्रण है।

Jharkhand Rajya Sabha Politics: राज्यसभा चुनाव का गणित

झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं। राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 28 प्रथम वरीयता के वोट चाहिए। JMM के नेतृत्व वाला महागठबंधन (JMM + कांग्रेस + RJD + CPI-ML) के पास करीब 56 विधायक हैं। यानी सैद्धांतिक रूप से गठबंधन दोनों सीटें आसानी से जीत सकता है।

  • JMM: 34 विधायक
  • कांग्रेस: 16 विधायक
  • RJD: 4
  • CPI(ML): 2

दूसरी ओर BJP के पास मात्र 21-22 विधायक हैं, जो एक सीट भी जीतने के लिए अपर्याप्त हैं। एक सीट शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई है, जबकि दूसरी BJP सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो रहा है।

JMM ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि एक सीट उसकी होनी चाहिए, क्योंकि वह मुख्यमंत्री पार्टी है और बड़ी ताकत रखती है। कांग्रेस लगातार एक सीट की मांग कर रही है और हाल ही में कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू व तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्का ने हेमंत सोरेन से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की।

JMM का दबदबा

#JMM के लिए यह चुनाव सिर्फ सीट जीतने का नहीं, बल्कि अपनी प्रमुखता बनाए रखने का भी है। शिबू सोरेन के निधन के बाद पार्टी परिवार-केंद्रित हो गई है। हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन और अन्य परिवारजनों के साथ पार्टी को मजबूत रखना चाहते हैं।

JMM का तर्क है कि राज्य की स्थापना में उसकी भूमिका सबसे बड़ी रही है। आदिवासी और पिछड़े वर्गों का प्रतिनिधित्व JMM बेहतर ढंग से करता है। अगर कांग्रेस को सीट दी गई तो JMM की छवि कमजोर पड़ सकती है। पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि एक सीट JMM के खाते में तय मानी जा रही है। दूसरी सीट पर बातचीत चल रही है, लेकिन JMM दोनों पर दावा छोड़ने को तैयार नहीं दिख रही।

कांग्रेस की बढ़ती मुश्किलें

कांग्रेस झारखंड में JMM की ‘छोटी बहन’ बनकर रह गई है। 2024 के विधानसभा चुनाव में JMM सबसे बड़ी पार्टी बनी और कांग्रेस ने समर्थन दिया। लेकिन अब कांग्रेस अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहती है।

  • सीट की मांग: कांग्रेस का कहना है कि गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या है, इसलिए दोनों सीटें बांटी जानी चाहिए। एक सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी उतारने का दावा मजबूत है।
  • आंतरिक असंतोष: झारखंड कांग्रेस के कई नेता मानते हैं कि अगर JMM दोनों सीटें ले गई तो पार्टी की गरिमा पर सवाल उठेंगे। इससे कार्यकर्ताओं में निराशा फैल सकती है।
  • राष्ट्रीय स्तर का प्रभाव: कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन को मजबूत रखना चाहती है, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर दबे रहने से उसकी छवि प्रभावित होती है।

हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेतृत्व के बीच हुई बैठक में दोनों सीटें गठबंधन के खाते में जाने की रणनीति पर चर्चा हुई, लेकिन सीट बंटवारे पर सहमति अभी बाकी है।

BJP की रणनीति

#BJP इस पूरे विवाद को अपने फायदे में बदलने की कोशिश कर रही है। पार्टी का आरोप है कि JMM-Congress गठबंधन में अंदरूनी कलह है और घोड़े बाजी की आशंका है। BJP ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर सतर्कता बरतने की मांग की है।

BJP की उम्मीद है कि अगर कांग्रेस को सीट नहीं मिली तो गठबंधन टूट सकता है या कमजोर हो सकता है। झारखंड में BJP आदिवासी वोट बैंक पर फोकस कर रही है और JMM की ‘परिवारवादी’ छवि को निशाना बना रही है।

नया सियासी गणित

यह राज्यसभा चुनाव झारखंड के 2026-27 विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा है।

  1. JMM की मजबूती: अगर JMM दोनों या एक मजबूत सीट जीतती है तो उसकी सरकार की स्थिरता बढ़ेगी।
  2. कांग्रेस का संकट: सीट न मिलने पर कांग्रेस को अपने बूते लड़ने की रणनीति बनानी पड़ सकती है, जो गठबंधन के भविष्य पर सवाल खड़ा करेगा।
  3. क्षेत्रीय समीकरण: संथाल परगना, कोल्हान और छोटानागपुर क्षेत्र में JMM का दबदबा है, जबकि कांग्रेस कुछ शहरी और अन्य क्षेत्रों में मजबूत है। सीट बंटवारा इन क्षेत्रों को भी प्रभावित करेगा।
  4. आदिवासी कार्ड: दोनों पार्टियां आदिवासी प्रतिनिधित्व का दावा करेंगी।

भविष्य की संभावनाएं

अगर JMM एक सीट पर अडिग रही और कांग्रेस को दूसरी मिल गई तो गठबंधन टिक सकता है। लेकिन JMM अगर दोनों सीटें चाहती है तो कांग्रेस को मुश्किल फैसला लेना पड़ेगा। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि कांग्रेस झारखंड में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए JMM पर दबाव बनाए रखेगी।

यह विवाद दिखाता है कि क्षेत्रीय दल (JMM) अब राष्ट्रीय दलों (कांग्रेस) के साथ बराबरी की शर्त पर गठबंधन करना चाहते हैं। झारखंड की जनता इस सियासी गणित को ध्यान से देख रही है। विकास, आदिवासी अधिकार और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे अंततः चुनावी नतीजों को तय करेंगे।

निष्कर्ष

Jharkhand Rajya Sabha Politics JMM की एक राज्यसभा सीट तय होने की खबर कांग्रेस के लिए चेतावनी है। यह दर्शाता है कि झारखंड में सत्ता का केंद्र JMM के पास है। कांग्रेस को अपनी रणनीति में बदलाव लाना होगा—चाहे वह सीट बंटवारे में समझौता हो या स्वतंत्र ताकत बनने की कोशिश।

झारखंड की राजनीति में ‘खेला’ हमेशा अनिश्चित रहता है। 18 जून का चुनाव न सिर्फ दो सीटों का फैसला करेगा, बल्कि महागठबंधन की मजबूती और BJP की वापसी की संभावनाओं को भी आकार देगा। सियासी विश्लेषक इस विकास को करीब से देख रहे हैं, क्योंकि यह 2026 के बड़े चुनावी युद्ध की पूर्वपीठिका साबित हो सकता है।

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