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अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद TMC में हड़कंप, नेताओं ने लौटाया वसूली का पैसा

On: June 2, 2026 6:26 AM
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TMC वसूली विवाद

TMC वसूली विवाद अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद TMC नेताओं में हलचल बढ़ गई है। आरोप है कि कुछ नेता लोगों से जबरन वसूला गया पैसा लौटाने पहुंचे। घटना को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

TMC वसूली विवाद

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर 30 मई 2026 को सोनारपुर में हुए हमले ने पार्टी में भारी हड़कंप मचा दिया है।

स्थानीय लोगों ने अभिषेक पर अंडे, पत्थर और जूते फेंके, उन्हें “चोर-चोर” के नारे लगाए। इस घटना के बाद TMC के कई नेताओं ने वसूली (कट मनी) का पैसा लौटाना शुरू कर दिया है। यह घटना सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही कथित भ्रष्टाचार, वसूली और तानाशाही के खिलाफ जनाक्रोश का प्रतीक बन गई है।

TMC वसूली विवाद : घटना का विस्तृत विवरण

30 मई 2026 को अभिषेक बनर्जी चुनाव बाद हिंसा में प्रभावित TMC कार्यकर्ताओं के परिवारों से मिलने सोनारपुर (दक्षिण 24 परगना) पहुंचे थे। स्थानीय महिलाओं और लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। भीड़ ने उन पर पत्थर, अंडे फेंके और धक्का-मुक्की की। अभिषेक ने हेलमेट पहनकर खुद को बचाया।

उन्होंने इस हमले को “बीजेपी प्रायोजित” बताया और कहा कि यह लोकतंत्र पर हमला है। हमले में उन्हें चोटें आईं, जिनका इलाज अस्पताल में हुआ। पुलिस ने घटना के बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन विवाद थमा नहीं।

इस हमले के ठीक एक दिन बाद TMC सांसद कल्याण बनर्जी पर भी हुगली के चंडीतला में हमला हुआ, जिससे पार्टी में दहशत फैल गई।

TMC में हड़कंप: क्यों लौटाया जा रहा वसूली का पैसा?

अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद TMC में खलबली मच गई है। कई इलाकों में TMC नेता और पंचायत सदस्य खुद-ब-खुद “कट मनी” (वसूली का पैसा) लौटाने लगे हैं:

  • कूचबिहार में एक TMC पंचायत सदस्य ने आवास योजना (PMAY) के लाभार्थियों से ली गई 5,000 से 25,000 रुपये तक की वसूली लौटाने की घोषणा की। माइक पर ऐलान किया गया कि 4 जून तक पैसा वापस कर दिया जाएगा।
  • नामखाना और अन्य इलाकों में भी TMC नेता पैसे लौटाने के लिए लोगों के घर-घर जा रहे हैं।
  • एक मामले में 50,000 रुपये की टेंडर वसूली भी वापस की गई।

लोगों का कहना है कि TMC शासन में विकास योजनाओं में 10-30% तक कट मनी ली जाती थी। सड़क, आवास, पेड़ लगाने जैसी योजनाओं में यह आम बात थी। अब सत्ता चले जाने के बाद डर के मारे नेता पैसे लौटा रहे हैं।

जनाक्रोश के कारण

पश्चिम बंगाल में 15 साल के TMC शासन में कथित तौर पर:

  • सिंडिकेट राज — ठेकेदारी और विकास कार्यों पर कब्जा।
  • कट मनी संस्कृति — हर योजना में कमीशन।
  • भय का माहौल — विरोध करने वालों पर हमले।
  • चुनाव बाद हिंसा — TMC की हार के बाद भी कार्यकर्ताओं पर हमले की शिकायतें।

अभिषेक बनर्जी पर हमला इसी जमा हुए गुस्से का नतीजा माना जा रहा है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि सालों की परेशानी अब निकल रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

  • TMC का पक्ष: ममता बनर्जी और अभिषेक ने हमले को “बीजेपी प्रायोजित” बताया। उन्होंने इसे राज्य में कानून-व्यवस्था की गिरावट करार दिया।
  • BJP का पक्ष: बीजेपी ने कहा कि यह जनता का गुस्सा है। TMC की भ्रष्टाचार और वसूली की नीतियों का नतीजा है। कोई प्लानिंग नहीं, बल्कि स्वाभाविक प्रतिक्रिया है।
  • अन्य पार्टियां: कांग्रेस और वामपंथी दलों ने भी TMC की आलोचना की।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ और स्थानीय लोग?

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि TMC अब पुरानी ताकत खो चुकी है। कार्यकर्ता और नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। कई जगहों पर TMC नेता अब पुलिस सुरक्षा मांग रहे हैं।

स्थानीय महिलाओं ने कहा, “अभिषेक जी ने पहले चुनाव में धमकी दी थी कि 4 मई के बाद डीजे बजाएंगे। अब जनता जवाब दे रही है।”

यह घटना दिखाती है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज अंततः सुनाई देती है।

सबक और आगे की चुनौतियां

  1. भ्रष्टाचार मुक्त शासन: नई सरकार को वसूली और सिंडिकेट राज पर पूरी तरह रोक लगानी होगी।
  2. जागरूकता: लोग अब सतर्क हो गए हैं। सोशल मीडिया और वीडियो के जरिए घटनाएं तेजी से उजागर हो रही हैं।
  3. सुरक्षा: विपक्षी नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
  4. न्याय: वसूली के मामलों की जांच होनी चाहिए ताकि पीड़ितों को राहत मिले।

TMC के लिए यह वक्त आत्मचिंतन का है। पार्टी को अपनी छवि सुधारनी होगी, वरना जनाक्रोश और बढ़ेगा।

निष्कर्ष

TMC वसूली विवाद: अभिषेक बनर्जी पर हमला और उसके बाद TMC नेताओं द्वारा वसूली का पैसा लौटाना पश्चिम बंगाल में एक नए युग की शुरुआत का संकेत है। जहां पहले TMC नेताओं पर कोई सवाल नहीं उठता था, वहां आज जनता सीधे जवाब मांग रही है।

यह घटना लोकतंत्र की जीत है। लेकिन साथ ही चुनौती भी है। नई सरकार को उम्मीदों पर खरा उतरना होगा। विकास, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन ही आगे का रास्ता है।

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