TMC Internal Conflict News तृणमूल कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है जहां ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व को चुनौती देते हुए बड़ा कदम उठाया है। ममता बनर्जी की पार्टी में यह अंदरूनी कलह आने वाले चुनावों पर भी गहरा असर डाल सकती है और राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से उतार-चढ़ाव भरी रही है, लेकिन जून 2026 में जो घटनाक्रम सामने आया है, वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंतरिक संकट साबित हो रहा है। ऋतब्रत बनर्जी नाम का एक नेता, जिन्हें हाल ही में पार्टी से निकाल दिया गया था, अब विधानसभा में विपक्ष का नेता बन चुके हैं। उन्होंने न केवल ममता बनर्जी की पार्टी को विभाजित किया है, बल्कि उनके भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें पार्टी संगठन और विधायक दल से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
यह घटना TMC की हालिया विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद आई है, जहां भाजपा ने भारी बहुमत से सरकार बनाई। इस ब्लॉग पोस्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि ऋतब्रत बनर्जी कौन हैं, उनकी राजनीतिक यात्रा क्या रही है और यह विद्रोह TMC के भविष्य पर क्या असर डालेगा।
TMC Internal Conflict News: ऋतब्रत बनर्जी का बैकग्राउंड
ऋतब्रत बनर्जी का जन्म 15 नवंबर 1979 को हुआ था। उन्होंने छात्र राजनीति से अपनी शुरुआत की और CPI(M) के छात्र संगठन SFI से जुड़े। वे CPM के युवा तुर्क के रूप में जाने जाते थे। 2014 में उन्हें पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सदस्य चुना गया। CPM में रहते हुए वे सक्रिय रहे, लेकिन 2017 के आसपास पार्टी से निष्कासित हो गए।
2020 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस जॉइन की। ममता बनर्जी की पार्टी में उन्होंने तेजी से तरक्की की और TMC के ट्रेड यूनियन विंग के प्रदेश अध्यक्ष बन गए। 2024 में वे दूसरी बार राज्यसभा पहुंचे। हाल के विधानसभा चुनाव में वे TMC के टिकट पर MLA चुने गए। उनकी छवि एक आक्रामक और संगठनात्मक नेता की रही है, जो वाम विचारधारा से प्रभावित रहते हुए भी ममता बनर्जी को “वास्तविक वामपंथी नेता” कह चुके हैं।
ऋतब्रत की ताकत: वे ग्राउंड लेवल पर मजबूत संपर्क रखते हैं, खासकर ट्रेड यूनियन और युवा कार्यकर्ताओं के बीच। उनकी बोलने की शैली आक्रामक है, जो TMC के पारंपरिक नेताओं से अलग है।
TMC में विद्रोह: चुनाव हार और आंतरिक असंतोष
मई 2026 के विधानसभा चुनाव में TMC को भारी झटका लगा। पार्टी मात्र 80 सीटों पर सिमट गई, जबकि भाजपा ने 207 सीटें जीतकर सरकार बनाई। इस हार के बाद पार्टी में असंतोष उबल पड़ा। टिकट वितरण, अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका और परिवारवाद के आरोपों ने कई नेताओं को नाराज कर दिया।
1 जून 2026 को TMC ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को “एंटी-पार्टी एक्टिविटी” के आरोप में निकाल दिया। लेकिन निष्कासन के महज दो दिन बाद, 3 जून को ऋतब्रत ने 58-59 TMC विधायकों के समर्थन के साथ विधानसभा स्पीकर रथींद्र बोस के पास पहुंचकर दावा किया कि वे असली TMC विधायक दल हैं।
स्पीकर ने उनके दावे को स्वीकार कर लिया और ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा का 14वां नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया। यह TMC के लिए करारी हार है।
अभिषेक बनर्जी पर सीधा हमला
ऋतब्रत बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कहा कि वे ममता बनर्जी को पार्टी की चेयरपर्सन और मुख्य सलाहकार के रूप में स्वीकार करते हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी का विधायक दल या संगठन में कोई रोल नहीं रहेगा। उन्होंने कहा:
- “अभिषेक बनर्जी का हमारी संसदीय पार्टी या पार्टी संगठन से कोई संबंध नहीं है।”
- “जनता ने उन्हें चोर की तरह पीटा है।”
- “वे डायमंड हार्बर के सांसद हैं, लेकिन विधानसभा से उनका कोई कनेक्शन नहीं।”
यह बयान TMC के अंदर “परिवार बनाम पार्टी” की लड़ाई को उजागर करता है। विद्रोहियों का आरोप है कि अभिषेक की इमेज और फैसलों ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया।
TMC का संकट
यह विद्रोह TMC के लिए अस्तित्व का संकट है। 80 में से 58+ विधायकों के समर्थन के साथ विद्रोही गुट दो-तिहाई बहुमत के करीब है, जिससे एंटी-डिफेक्शन कानून का उल्लंघन नहीं होता। अब सवाल यह है:
- क्या ममता बनर्जी विद्रोहियों से समझौता करेंगी?
- क्या अभिषेक को पीछे हटना पड़ेगा?
- पार्टी का नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर किसका कब्जा होगा?
TMC ने कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही है, लेकिन फिलहाल विद्रोही मजबूत स्थिति में हैं। साथ ही, ED द्वारा अभिषेक बनर्जी को समन और कोलकाता मेयर फिरहाद हाकिम जैसे नेताओं के इस्तीफे की खबरें पार्टी को और कमजोर कर रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषण
यह घटना पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।
TMC के लिए: अगर विद्रोह काबू में नहीं आया तो पार्टी दो टुकड़ों में बंट सकती है। ममता बनर्जी की करिश्माई छवि पर भी असर पड़ेगा।
भाजपा के लिए: विपक्ष में TMC का विभाजन उन्हें और मजबूत बनाएगा।
कांग्रेस और वामपंथ के लिए: वे इस मौके का फायदा उठा सकते हैं।
ऋतब्रत बनर्जी ने खुद को “ईknath Shinde” जैसा नेता साबित किया है, जो पार्टी के अंदर से विद्रोह करके नई पहचान बना रहे हैं।
निष्कर्ष
TMC Internal Conflict News: ऋतब्रत बनर्जी का उदय TMC के लिए चेतावनी है। यह दिखाता है कि परिवारवाद, केंद्रित सत्ता और चुनावी हार पार्टी को अंदर से खोखला कर सकती है। ममता बनर्जी अगर कुशलता से स्थिति संभालती हैं तो पार्टी बच सकती है, वरना 2026 का यह विद्रोह TMC के पतन की शुरुआत साबित हो सकता है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में “खेल अभी बाकी है”, लेकिन ऋतब्रत बनर्जी ने साफ कर दिया है कि अब पुराने तरीके से काम नहीं चलेगा। जनता और कार्यकर्ता अब जवाबदेही मांग रहे हैं।





