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2026 में मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग खिचड़ी दान के नियम, शुभ मुहूर्त और क्या करें क्या न करें!

On: January 12, 2026 9:50 AM
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2026 में मकर संक्रांति

2026 में मकर संक्रांति : मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो सूर्य देव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश के साथ उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। यह त्योहार फसल, समृद्धि, स्वास्थ्य और नए आरंभ का उत्सव माना जाता है। लेकिन साल 2026 में यह पर्व और भी खास हो गया है क्योंकि 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के साथ ही षटतिला एकादशी (पौष मास की एकादशी) भी पड़ रही है। यह दुर्लभ संयोग लगभग 23 साल बाद बन रहा है, जिससे श्रद्धालुओं के मन में खिचड़ी दान, व्रत और पूजन को लेकर काफी भ्रम है।

मकर संक्रांति 2026: तिथि, समय और महत्व

पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को सूर्य देव दोपहर लगभग 3:13 बजे से 3:15 बजे के आसपास मकर राशि में प्रवेश करेंगे। यह उत्तरायण का प्रारंभ है, जब दिन बड़े होने लगते हैं और सूर्य की शक्ति बढ़ती है। इस दिन सूर्य को अर्घ्य देना, स्नान-दान करना, जप-तप और खासकर तिल-गुड़ का दान अत्यंत शुभ माना जाता है।

लेकिन इस साल एकादशी तिथि होने से कई लोग कन्फ्यूज हैं कि क्या खिचड़ी बनाई जाए, खाई जाए या दान की जाए?

2026 में मकर संक्रांति
2026 में मकर संक्रांति

एकादशी और मकर संक्रांति का संयोग: शास्त्र क्या कहते हैं?

ज्योतिषाचार्यों और पंडितों (जैसे सहारनपुर के आचार्य सोम प्रकाश शास्त्री) के अनुसार, जब एकादशी और मकर संक्रांति एक दिन पड़ती हैं तो एकादशी का व्रत और नियम सर्वोपरि होते हैं। एकादशी पर अनाज (खासकर चावल) का सेवन, छूना या दान वर्जित है क्योंकि यह व्रत भंग कर सकता है।

  • दिन में एकादशी का व्रत रखें, भगवान विष्णु की पूजा करें और षटतिला एकादशी के नियमों का पालन करें।
  • शाम में (सूर्यास्त के बाद या द्वादशी शुरू होने पर) मकर संक्रांति का उत्सव मनाएं।

शाम 6:40 बजे के बाद (द्वादशी लगने पर) मीठी खिचड़ी (मूंग दाल या साबूदाना वाली) का सेवन कर सकते हैं, ताकि दोनों पर्वों का फल मिले।

खिचड़ी दान के नियम 2026: क्या करें, क्या न करें?

  • मकर संक्रांति पर खिचड़ी दान का विशेष महत्व है क्योंकि यह पितरों की शांति और सूर्य देव की कृपा से जुड़ा है।
  • लेकिन इस साल एकादशी के कारण नियम बदल गए हैं:

14 जनवरी (एकादशी वाले दिन) क्या न करें:

  • चावल या दाल-चावल की खिचड़ी का दान या सेवन न करें।
  • अनाज से बनी कोई चीज दान न दें, वरना व्रत भंग हो सकता है।

इसके बजाय 14 जनवरी को दान करें:

  • तिल (सफेद तिल विशेष शुभ), गुड़, रेवड़ी, गजक
  • ऊनी वस्त्र, कंबल, जूते, छाता
  • फल, दूध, घी या तिल से बनी मिठाई

15 जनवरी (द्वादशी पर) खिचड़ी दान करें:

  • यदि आप खिचड़ी का दान जरूर करना चाहते हैं तो अगले दिन यानी 15 जनवरी को चावल-खिचड़ी का दान करें। यह शास्त्र सम्मत है और दोनों पर्वों का पूरा पुण्य मिलेगा।

दान हमेशा संकल्प लेकर, पितरों या जरूरतमंदों के नाम से मंदिर या ब्राह्मणों को दें।

अन्य महत्वपूर्ण नियम और सुझाव

  • सूर्य को अर्घ्य दें – तांबे के लोटे से जल, लाल फूल, गुड़ और लाल चंदन मिलाकर।
  • काले तिल का दान न करें, इससे सूर्य-शनि में विरोध बढ़ सकता है।
  • सात्विक भोजन करें – तिल, गुड़, फल आदि।
  • इस दुर्लभ संयोग से स्वास्थ्य, धन, अन्न और पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है।

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