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राज्यसभा चुनाव में BJP का बड़ा इम्तिहान NDA 15 सीटों से दूर, क्या बदलेंगे समीकरण?

On: June 5, 2026 4:54 AM
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राज्यसभा चुनाव BJP

राज्यसभा चुनाव BJP राज्यसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुकाबला बेहद कठिन होता दिख रहा है। एनडीए अभी जादुई आंकड़े से 15 सीटें दूर है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और विपक्ष को बढ़त मिलने की संभावना भी बढ़ गई है।

राज्यसभा चुनाव BJP

भारतीय राजनीति में राज्यसभा हमेशा से बहस और रणनीति का केंद्र रही है। लोकसभा में बहुमत के बावजूद, संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत (लगभग 164 सीटें) जरूरी होता है। जून 2026 के राज्यसभा चुनावों में BJP के नेतृत्व वाले NDA का सामना एक बड़े इम्तिहान से है। वर्तमान में NDA के पास करीब 148 सीटें हैं, यानी दो-तिहाई बहुमत से 15-16 सीटें कम। इस चुनाव में 24 सीटों (10 राज्यों) पर वोटिंग 18 जून को होने वाली है, जहां NDA को मजबूत स्थिति में माना जा रहा है, लेकिन विपक्षी INDIA गठबंधन भी चुनौतियां खड़ी कर रहा है।

यह चुनाव सिर्फ सीटों की गिनती नहीं, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को नया आकार देने वाला है। BJP के लिए यह मौका है अपनी ताकत बढ़ाने का, जबकि कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है।

राज्यसभा चुनाव BJP: NDA कितनी दूर है बहुमत से?

राज्यसभा की कुल 245 सीटों में 233 चुनी हुई और 12 मनोनीत होती हैं। NDA के पास फिलहाल BJP की 113 सीटों समेत कुल 148 सीटें हैं। दो-तिहाई बहुमत (164) के लिए 15-16 सीटों की कमी है। मार्च 2026 के पिछले दौर में NDA ने 37 सीटों में से 22 जीतीं, जिससे उसकी ताकत बढ़ी, लेकिन लक्ष्य अभी दूर है।

JDU, Shiv Sena (Shinde), TDP, NCP (Ajit Pawar) जैसे सहयोगी NDA को मजबूती देते हैं। विपक्षी INDIA ब्लॉक में कांग्रेस की संख्या करीब 29-30 है, जो BJP से काफी कम है। फिर भी, कुछ राज्यों में क्रॉस वोटिंग और गठबंधन की कमजोरियां NDA के लिए चुनौती बन सकती हैं।

चुनाव का गणित: 10 राज्यों में कौन-कौन सी सीटें?

18 जून को आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु आदि राज्यों में सीटें खाली हो रही हैं।

  • आंध्र प्रदेश: TDP-led NDA को 4 सीटों पर क्लीन स्वीप की उम्मीद। YSRCP की सीटें भी प्रभावित हो सकती हैं।
  • गुजरात: BJP की मजबूत पकड़, 4 सीटों पर फायदा संभव।
  • महाराष्ट्र: शिवसेना और NCP के साथ गठबंधन में तालमेल जरूरी। यहां कुछ सीटों पर टक्कर।
  • कर्नाटक और झारखंड: विपक्षी सरकारों वाले राज्यों में NDA को नुकसान का खतरा। कांग्रेस-JMM गठबंधन सख्ती से लड़ रहा है।

विधायकों की संख्या के आधार पर NDA को इन 24 सीटों में से 17 मिलने का अनुमान है, जबकि विपक्ष को 7। इससे NDA की कुल ताकत बढ़ेगी, लेकिन दो-तिहाई बहुमत अभी भी मुश्किल।

BJP की रणनीति गठबंधन और क्रॉस वोटिंग पर फोकस

BJP इस चुनाव को संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन बनाने में लगी है। उम्मीदवार चयन में अनुभवी नेताओं को तरजीह दी जा रही है। NDA सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग में समझौता किया गया है, जैसे बिहार में JDU के साथ तालमेल।

क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए BJP whips जारी कर रही है और विधायकों की निगरानी बढ़ाई गई है। ओडिशा और हरियाणा जैसे राज्यों में पिछले दौर में क्रॉस वोटिंग ने विपक्ष को नुकसान पहुंचाया था। BJP का फोकस उन राज्यों पर है जहां उसकी सरकार है या मजबूत सहयोगी हैं।

विपक्ष की चुनौतियां: INDIA ब्लॉक में दरारें

कांग्रेस के लिए यह चुनाव मुश्किल है। कई राज्यों में क्षेत्रीय दल जैसे BJD, TMC, DMK अपनी राह चले जा रहे हैं। महाराष्ट्र में Shiv Sena (UBT) और NCP (Sharad Pawar) गुट विपक्ष को कुछ उम्मीद देते हैं, लेकिन संख्या कम है।

INDIA गठबंधन में समन्वय की कमी और कुछ राज्यों में आंतरिक कलह NDA के पक्ष में जा रही है। फिर भी, कर्नाटक और झारखंड जैसे राज्यों में विपक्ष मजबूत लड़ाई लड़ सकता है।

क्या बदलेंगे समीकरण? संभावित परिदृश्य

  1. NDA की मजबूती: अगर NDA 17-18 सीटें जीतता है, तो उसकी संख्या 160 के करीब पहुंच सकती है। इससे संविधान संशोधनों के लिए और सहयोगियों पर निर्भरता कम होगी।
  2. विपक्ष का प्रतिरोध: अगर क्रॉस वोटिंग होती है या NDA कुछ सीटें गंवाता है, तो समीकरण जस के तस रह सकते हैं।
  3. 2029 का प्रभाव: मजबूत राज्यसभा NDA को नीतिगत स्थिरता देगी, जैसे UCC, Farm Laws 2.0 या अन्य सुधारों में। विपक्ष के लिए यह लोकसभा चुनाव से पहले नैतिक हार होगी।

क्षेत्रीय राजनीति भी भूमिका निभाएगी। दक्षिण भारत में BJP का विस्तार (आंध्र, तेलंगाना) और पूर्वोत्तर में सहयोगी दलों का समर्थन महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

राज्यसभा चुनाव BJP के लिए सिर्फ सीटें जीतने का नहीं, बल्कि शासन की निरंतरता का इम्तिहान है। NDA अगर 15 सीटों की कमी पूरी कर पाता है या करीब पहुंच जाता है, तो केंद्र में उसकी पकड़ और मजबूत होगी। विपक्ष को एकजुट होकर लड़ना होगा, वरना दरारें बढ़ेंगी।

भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती इसी में है कि हर चुनाव नया समीकरण बना सकता है। 18 जून के नतीजे न सिर्फ सदन का गणित बदलेंगे, बल्कि अगले कुछ सालों की राजनीति की दिशा तय करेंगे। BJP को अपनी रणनीति पर अमल करना होगा, जबकि विपक्ष को अपनी कमियों से सबक लेना चाहिए।

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