रवनीत बिट्टू : केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बिट्टू का दावा है कि करीब पांच साल पहले किसान आंदोलन के दौरान प्रियंका गांधी ने उन्हें जानबूझकर प्रदर्शनकारी किसानों के बीच भेजा, जहां उनकी लिंचिंग की साजिश रची गई थी। यह घटना उस समय की है जब बिट्टू और विधायक कुलबीर जीरा किसानों की भीड़ में फंस गए थे और उन पर जानलेवा हमला हुआ। बिट्टू ने अब इस मामले की जांच की मांग की है और प्रियंका गांधी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की है। यह आरोप 18 फरवरी 2026 को चंडीगढ़ से जुड़े एक इंटरव्यू में सामने आया, जिसने भाजपा और कांग्रेस के बीच नए विवाद को जन्म दिया है।
आरोप की पूरी कहानी: पांच साल पुरानी घटना का खुलासा
बिट्टू ने ‘द ट्रिब्यून’ को दिए इंटरव्यू में विस्तार से बताया कि प्रियंका गांधी अच्छी तरह जानती थीं कि किसान उनके प्रति कितने आक्रोशित थे। फिर भी, उन्हें विरोध प्रदर्शन स्थल पर भेजा गया। बिट्टू ने कहा, “मैं इस बात की जांच करवाना चाहता हूं कि आखिर मुझे वहां भेजने के पीछे उनकी मंशा क्या थी। क्या वह कोई बड़ी घटना करवाना चाहती थीं? उस दिन कुछ भी हो सकता था। प्रियंका गांधी की ओर से यह एक हताशा भरा प्रयास था ताकि किसानों के बीच भाजपा विरोधी भावनाओं को और भड़काया जा सके।” उन्होंने घटना को याद करते हुए कहा कि वह और कुलबीर जीरा उस दिन किसानों की भीड़ द्वारा लगभग ‘लिंच’ कर दिए गए होते। बिट्टू का मानना है कि यह एक पूर्व-नियोजित ‘प्लान और डिजाइन’ था, जिसका मकसद उन्हें नुकसान पहुंचाना और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना था।

यह घटना किसान आंदोलन के चरम पर थी, जब तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। बिट्टू, जो उस समय कांग्रेस में थे लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गए, को किसानों के बीच भेजा गया था। उनके अनुसार, प्रियंका गांधी की यह रणनीति भाजपा को बदनाम करने की थी। बिट्टू ने जोर देकर कहा कि अगर जांच हुई तो सच्चाई सामने आएगी और इस साजिश के पीछे की मंशा उजागर होगी।
राहुल गांधी पर पलटवार: ‘गद्दार’ वाली टिप्पणी का जवाब
- बिट्टू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उन्हें ‘गद्दार’ कहे जाने पर भी तीखा पलटवार किया।
- उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने इस तरह की हल्की बातें करके अपने पद की गरिमा गिराई है।
- बिट्टू ने सवाल उठाया कि कांग्रेस में कई ऐसे नेता और सांसद हैं जो दूसरी पार्टियों से आए हैं,
- तो क्या राहुल गांधी का मतलब है कि उनके साथ मौजूद ऐसे सभी नेता गद्दार हैं? यह टिप्पणी बिट्टू के भाजपा
- में शामिल होने के बाद की है, जो कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका था। बिट्टू का कहना है
- कि ऐसी बयानबाजी से कांग्रेस अपनी विश्वसनीयता खो रही है।
कांग्रेस का तीखा जवाब: पब्लिसिटी स्टंट या राजनीतिक दबाव?
- कांग्रेस ने बिट्टू के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पंजाब के नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा
- ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि बिट्टू द्वारा प्रियंका गांधी को इस विवाद में घसीटना
- केवल सुर्खियां बटोरने की एक हताश कोशिश है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “सालों बाद बिट्टू की याददाश्त
- अचानक वापस आ गई है, ठीक उसी वक्त जब उनके राजनीतिक आकाओं ने उन पर शिकंजा कसा है।
- पंजाब की राजनीति का यह ‘फुस हो चुका कारतूस’ अब सबसे ज्यादा शोर मचा रहा है।”
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी बिट्टू के आरोपों को बचकानी हरकत बताया। उन्होंने कहा, “यह कहना कि प्रियंका गांधी ने उन्हें जबरदस्ती विरोध प्रदर्शन स्थल पर भेजा, हास्यास्पद है। बिट्टू को अपने नए आकाओं की ‘गुड बुक्स’ में रहने के लिए क्या-क्या करना पड़ रहा है, यह देखकर दुख होता है।” कांग्रेस का मानना है कि बिट्टू भाजपा के दबाव में ऐसे आरोप लगा रहे हैं ताकि अपनी स्थिति मजबूत कर सकें। यह विवाद पंजाब की राजनीति में नए टकराव को जन्म दे सकता है, जहां किसान आंदोलन अभी भी एक संवेदनशील मुद्दा है।
किसान आंदोलन का संदर्भ और जांच की मांग
- किसान आंदोलन 2020-21 में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ था, जिसमें लाखों किसान दिल्ली बॉर्डर पर डटे थे।
- बिट्टू की घटना उस समय की है जब राजनीतिक दलों के नेता किसानों से मिलने जा रहे थे। बिट्टू का आरोप है
- कि प्रियंका गांधी ने जानबूझकर उन्हें खतरे में डाला। अब बिट्टू जांच की मांग कर रहे हैं, जो अगर हुई
- तो कई बड़े खुलासे कर सकती है। यह मामला राजनीतिक साजिशों की जांच के लिए एक मिसाल बन सकता है।
राजनीतिक तनाव का नया दौर
रवनीत बिट्टू के इस आरोप ने भाजपा-कांग्रेस के बीच तनाव बढ़ा दिया है। जहां बिट्टू इसे साजिश बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे हताशा की उपज मानती है। आने वाले दिनों में अगर शिकायत दर्ज हुई तो जांच से सच्चाई सामने आएगी। यह घटना दिखाती है कि किसान आंदोलन के जख्म अभी भरे नहीं हैं और राजनीतिक लाभ के लिए पुरानी घटनाएं फिर से उछाली जा रही हैं। पंजाब की राजनीति में यह विवाद नई बहस छेड़ सकता है।
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