कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता : कर्नाटक की राजनीति इन दिनों गरमागरम है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच चल रही सत्ता की खींचतान अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। जहां एक तरफ डीके शिवकुमार खेमा विधायकों की मीटिंग बुलाकर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में था, वहीं मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने चालाकी भरा दांव चलते हुए 27 कांग्रेस विधायकों को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर ले जा रहे हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पार्टी के अंदर कलह चरम पर है और सीएम पद को लेकर विवाद तेज हो गया है।
कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संघर्ष की जड़ें
2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कर्नाटक में जीत हासिल की थी। तब से ही खेमेबाजी शुरू हो गई। डीके शिवकुमार के समर्थक दावा करते रहे हैं कि सत्ता साझेदारी के समझौते के तहत ढाई साल बाद डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन सिद्धारमैया खेमा इस दावे को सिरे से खारिज करता रहा है। इस बीच पार्टी हाईकमान से लेकर स्थानीय स्तर तक चर्चा चल रही है कि कौन बनेगा अगला मुख्यमंत्री।

हाल ही में डीके शिवकुमार ने दिल्ली में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य आलाकमान से मुलाकात की। उनके समर्थकों ने दावा किया कि 136 विधायक उनके साथ हैं, जबकि कुछ अन्य विधायकों ने 80-90 विधायकों के समर्थन का हवाला दिया। दूसरी ओर, सिद्धारमैया के बेटे और विधान परिषद सदस्य यथेंद्र सिद्धारमैया ने कहा कि उनके पिता पूरा 5 साल का कार्यकाल पूरा करेंगे।
27 विधायकों का ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड दौरा: राजनीतिक चाल या स्टडी टूर?
लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कांग्रेस के 27 विधायकों को विदेशी दौरा पर ले जा रहे हैं। यह दौरा 16 फरवरी से शुरू होकर मार्च तक चल सकता है। आधिकारिक तौर पर इसे पशुपालन और डेयरी प्रबंधन की स्टडी टूर बताया जा रहा है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दूध उत्पादन में अग्रणी देश हैं। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे सिद्धारमैया खेमे की चाल माना जा रहा है।
- सूत्रों का कहना है कि यह दौरा डीके शिवकुमार द्वारा बुलाई जा रही मीटिंग को काउंटर करने के लिए है।
- शिवकुमार खेमा विधायकों को रिसॉर्ट में ठहराकर शक्ति प्रदर्शन की योजना बना रहा था, लेकिन सिद्धारमैया
- के समर्थक विधायकों को विदेश भेजकर उसकी योजना पर पानी फेर दिया गया है।
- शुरुआत में 35 विधायकों की बात थी, लेकिन बाद में संख्या घटकर 20-27 के आसपास रह गई।
- ज्यादातर विधायक सिद्धारमैया के वफादार बताए जा रहे हैं, जबकि शिवकुमार समर्थकों
- ने इस दौरे में शामिल होने से इनकार कर दिया।
- कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह दौरा विधायकों की अपनी जेब से हो रहा है
- सरकार का कोई खर्च नहीं है। लेकिन विपक्ष और आम जनता इसे टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी बता रही है।
- कांग्रेस हाईकमान ने भी इस पर नजर रखी हुई है और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने
- विधायकों से यात्रा टालने को कहा था, लेकिन कुछ ने अनसुना कर दिया।
क्या कहते हैं दोनों खेमे?
- डीके शिवकुमार ने हाल ही में कहा है कि नेतृत्व पर कोई कन्फ्यूजन नहीं है
- और हाईकमान के फैसले का पालन करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को सार्वजनिक बयान देने से भी मना किया है।
- वहीं सिद्धारमैया मीडिया से कहते हैं, “कुछ और पूछिए” – यानी सीएम बदलाव के सवाल से बचते नजर आते हैं।
- दोनों ही हाईकमान के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
कर्नाटक कांग्रेस का भविष्य
यह दौरा सिर्फ एक ट्रिप नहीं, बल्कि कर्नाटक कांग्रेस में चल रहे सिद्धारमैया vs डीके शिवकुमार के पावर स्ट्रगल का नया अध्याय है। बजट सेशन से पहले यह हलचल पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। अगर हाईकमान हस्तक्षेप नहीं करता, तो आंतरिक कलह और बढ़ सकती है। फिलहाल राजनीतिक हलचल जारी है और सभी की निगाहें दिल्ली पर टिकी हैं।










