थाईलैंड कंबोडिया बॉर्डर थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर विवाद: जोरदार बमबारी से तनाव चरम पर! ट्रंप के सीजफायर दावे पर दोनों देशों की खामोशी। लेटेस्ट न्यूज, वीडियो और अपडेट्स।
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद एक बार फिर भड़क उठा है। बॉर्डर पर जोरदार बमबारी की खबरें आ रही हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया सीजफायर दावे पर दोनों देशों की खामोशी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह संघर्ष फिर से युद्ध का रूप लेगा? आइए इसकी पूरी स्टोरी समझते हैं।

बॉर्डर पर बमबारी का तांडव: क्या हुआ आखिर?
थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर पर प्रेचा विहार मंदिर इलाके में शुक्रवार रात से ही भारी बमबारी शुरू हो गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों सेनाओं ने एक-दूसरे पर आर्टिलरी फायरिंग की, जिसमें कम से कम 12 सैनिक शहीद और 50 से ज्यादा घायल बताए जा रहे हैं। थाईलैंड की तरफ से आधिकारिक बयान में “आत्मरक्षा” का हवाला दिया गया, जबकि कंबोडिया ने इसे “सीमा उल्लंघन” करार दिया।
यह विवाद प्रेचा विहार मंदिर को लेकर पुराना है, जो 1962 में ICJ ने कंबोडिया को दिया था, लेकिन थाईलैंड आज भी दावा करता है। हाल के वर्षों में पानी की कमी और सीमा चेकपोस्ट्स पर झड़पें बढ़ी हैं। लेकिन इस बार बमबारी की तीव्रता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंतित कर दिया है।
थाईलैंड कंबोडिया बॉर्डर ट्रंप का सीजफायर दावा: हकीकत क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर दावा किया था कि “मैंने थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर पर सीजफायर करवा दिया है। शांति बहाल!” लेकिन बॉर्डर पर बमबारी की वीडियो और रिपोर्ट्स ने उनके दावे की पोल खोल दी। न तो थाईलैंड के पीएम सेट्ठा थाविसिन ने कुछ कहा, न ही कंबोडिया के हंसी सीन ने प्रतिक्रिया दी।
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का यह दावा उनकी “पीस ब्रोकर” इमेज बनाने की कोशिश है, लेकिन बिना दोनों देशों की सहमति के यह खोखला साबित हो रहा। ट्रंप प्रशासन ने ASEAN को फोन किया था, लेकिन कोई ठोस प्रोग्रेस नहीं हुई। क्या यह डिप्लोमेटिक ब्लफ है?
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: पुराना जख्म फिर से हरा
थाईलैंड-कंबोडिया बॉर्डर विवाद 20वीं सदी से चला आ रहा है।
2008-2011 में इसी प्रेचा विहार पर भारी झड़पें हुईं,
जिसमें 30 से ज्यादा जवान मारे गए। तब ASEAN ने मध्यस्थता की थी।
अब जलवायु परिवर्तन से पानी की होड़ और चाइना का कंबोडिया को हथियार सप्लाई करना तनाव बढ़ा रहा है।
थाईलैंड अमेरिका के करीब है, जबकि कंबोडिया बीजिंग का समर्थक।
दोनों देशों की चुप्पी: रणनीतिक सन्नाटा या डर?
ट्रंप के दावे पर थाईलैंड और कंबोडिया की खामोशी चौंकाने वाली है। थाई सरकार ने सिर्फ “स्थिति नियंत्रण में” कहा, जबकि कंबोडिया ने मीडिया ब्लैकआउट लगा दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश ट्रंप को नजरअंदाज कर द्विपक्षीय बातचीत पर जोर देना चाहते हैं। लेकिन अगर बमबारी जारी रही, तो UN इंटरफेयर कर सकता है।
वैश्विक प्रभाव: एशिया में अस्थिरता का खतरा
यह संघर्ष दक्षिण-पूर्व एशिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा।
थाईलैंड का टूरिज्म और कंबोडिया का एक्सपोर्ट प्रभावित हो सकता है।
चाइना और अमेरिका के बीच प्रॉक्सी वॉर का डर भी है।
भारत ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है।
आगे क्या? संभावित परिणाम
अगर बमबारी न रुकी, तो ASEAN इमरजेंसी मीटिंग बुला सकता है।
ट्रंप अगर सैन्य मदद की बात करेंगे, तो मामला और बिगड़ सकता है।
दोनों देशों को तत्काल सीजफायर और बातचीत करनी चाहिए।
दुनिया थाईलैंड कंबोडिया बॉर्डर पर नजर रखे हुए है।







