भारत न्यूजीलैंड FTA न्यूजीलैंड विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स का भारत-NZ FTA पर तीखा विरोध: “न तो फ्री, न फेयर!” PM मोदी-लक्सन की ऐतिहासिक ट्रेड डील पर NZ सरकार में फूट। दूध-कृषि उत्पादों पर चिंता, जानें विवाद की पूरी कहानी।

#न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री का FTA पर विरोध: भारत-NZ FTA न तो मुक्त, न न्यायसंगत
भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर होने के बाद न्यूजीलैंड में सियासी भूचाल आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन के बीच 21 दिसंबर 2025 को हुई बातचीत ने इस डील को अंतिम रूप दिया। लेकिन न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इसे “न तो फ्री, न फेयर” करार देकर खुला विरोध जता दिया। यह विवाद भारत न्यूजीलैंड FTA की सफलता पर सवाल खड़े कर रहा है। आइए जानते हैं इसकी पूरी कहानी।<cite></cite><cite></cite>
FTA डील की शुरुआत और महत्व
भारत-न्यूजीलैंड FTA की बात 2010 से चल रही थी, लेकिन अमेरिकी दबाव और घरेलू चिंताओं के कारण रुकी हुई थी। 2025 में दोनों देशों ने इसे पुनर्जीवित किया। इस डील से भारत को डेयरी, फल-सब्जियां और वाइन जैसे न्यूजीलैंड उत्पादों पर टैरिफ में भारी छूट मिलेगी। वहीं, न्यूजीलैंड को आईटी, फार्मा और टेक्सटाइल्स में बाजार खुलने का फायदा होगा। पीएम मोदी ने इसे “ऐतिहासिक” बताया, जबकि लक्सन ने आर्थिक वृद्धि का वादा किया। अनुमान है कि यह डील अगले 5 साल में द्विपक्षीय व्यापार को 20 बिलियन डॉलर तक ले जाएगी। लेकिन न्यूजीलैंड विदेश मंत्री FTA विरोध के केंद्र में हैं।<cite></cite><cite></cite>
विंस्टन पीटर्स का तीखा विरोध: मुख्य कारण
न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स, जो न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी के नेता हैं,
ने 22 दिसंबर को संसद में कहा, “यह भारत-NZ FTA न तो मुक्त है,
न न्यायसंगत।” उनका मुख्य ऐतराज दूध और कृषि उत्पादों पर है।
न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था डेयरी पर निर्भर है, और पीटर्स का मानना है
कि भारत की सब्सिडी और बाजार संरक्षण नीतियां न्यूजीलैंड के किसानों को नुकसान पहुंचाएंगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि “फ्री ट्रेड का मतलब सबको फायदा, न कि सिर्फ बड़े देशों को।
” यह बयान लक्सन सरकार के लिए शर्मिंदगी का सबब बन गया,
क्योंकि पीटर्स गठबंधन में भागीदार हैं।
पीटर्स ने आगे कहा कि डील में पर्यावरण मानकों और श्रम कानूनों पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं है।
न्यूजीलैंड के किसान संगठनों ने भी उनका साथ दिया, दावा करते हुए कि भारत का बाजार “बंद” रहेगा।
यह विरोध NZ फर्स्ट पार्टी की पॉपुलिस्ट लाइन से मेल खाता है।
भारतीय पक्ष और वैश्विक प्रतिक्रिया
भारत ने पीटर्स के बयान को खारिज करते हुए कहा कि FTA पारदर्शी है
और दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखा गया। वाणिज्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार,
भारत ने न्यूजीलैंड को 90% लाइन्स पर ड्यूटी खत्म करने का वादा किया है।
पीएम मोदी ने लक्सन से फोन पर बात की, लेकिन विवाद सुलझा नहीं।
अमेरिका ने पहले इस डील को रोका था, अब NZ आंतरिक कलह इसका शिकार हो रहा है।
वैश्विक मीडिया में इसे “ट्रेड डील पर घरेलू विद्रोह” कहा जा रहा।
ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देश भारत के साथ FTA कर चुके हैं, जो NZ के लिए दबाव बढ़ा रहा।
विवाद के प्रभाव और भविष्य
न्यूजीलैंड विदेश मंत्री FTA विरोध से डील लागू होने में देरी हो सकती है।
NZ संसद में बहस तेज हो गई है, और 2026 चुनावों से पहले यह मुद्दा गर्म रहेगा।
भारत के लिए यह निर्यात अवसर खोने का जोखिम है। कुल मिलाकर,
भारत न्यूजीलैंड FTA आर्थिक लाभ के साथ राजनीतिक चुनौतियां ला रहा। क्या पीटर्स का विरोध डील तोड़ देगा?











