दिल्ली यूनिवर्सिटी भर्ती घोटाला भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोप: कुछ शिक्षकों का कहना है कि इंटरव्यू और भर्ती के दौरान अनौपचारिक भुगतान की बातें हो रही हैं, और बड़े पैमाने पर पैसे की लेनदेन की अफवाहें फैल रही हैं।

भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप
दिल्ली यूनिवर्सिटी में नौकरी पाने के लिए कथित तौर पर भारी रकम की रिश्वत लेने की बातें आम हो गई हैं।
शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच एक तरह की अवाजाही और डर का माहौल है, जहां वे खुलकर इस पर बोलने से कतरा रहे हैं
। कई वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि उन्हें या अन्य अभ्यर्थियों को असिस्टेंट प्रोफेसर या अन्य पदों के लिए
आवेदन करने के दौरान 50 लाख रुपये तक ‘अनौपचारिक रूप से’ देने का दबाव बनाया गया है।
हालांकि इस मामले में कोई ठोस प्रमाण या औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई, इस अफवाह ने
भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस भर्ती प्रक्रिया में वे विभागाध्यक्ष, कॉलेज प्रिंसिपल, बाहरी विशेषज्ञ, और चयन समिति के अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण रोल होता है।
आरोप है कि यह समिति कई बार अपने सदस्यों की भूमिका और पैनल में अनियमित बदलाव न होने की वजह से पक्षपातपूर्ण होती
जा रही है। एक ही पैनल बार-बार महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने के कारण चयन की पारदर्शिता प्रभावित हो रही है,
जिससे पूरे सिस्टम में नकारात्मक माहौल है।
कर्मचारियों का शोषण और भर्ती प्रक्रिया की कमी
दिल्ली यूनिवर्सिटी में न सिर्फ चयन प्रक्रिया में भ्रष्टराचार है, बल्कि कर्मचारियों के शोषण की भी खबरें मिल रही हैं।
जहां कई कॉलेजों में कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के निकाला जा रहा है, वहीं नए कांट्रेक्ट
के लिए भी खुलकर रिश्वत मांगी जा रही है। इसके अलावा पुराने और अनुभवी कर्मचारियों को बाहर करके नए,
कम अनुभवी कर्मी लाए जा रहे हैं, जो ठेकेदारी प्रथा को नए सिरे से संगठित कर रहा है। इस स्थिति से कर्मचारी
हड़ताल पर भी जाने को मजबूर हो गए हैं, जो विश्वविद्यालय में कार्य-संस्कृति को और प्रभावित कर रही है।
प्रदर्शनों और विरोध के बीच भारी डर का माहौल
भर्ती प्रक्रिया की इन गड़बड़ियों को लेकर कई कॉलेजों में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने प्रदर्शन किए हैं। स्थायी पदों पर भर्ती में देरी,
ऐड-हॉक शिक्षकों की उपेक्षा, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव और भर्ती पैनल की संरचना के मुद्दों पर गंभीर विरोध देखा
गया है। इसके बावजूद अधिकांश शिक्षकों और कर्मचारियों में शिकायत दर्ज कराने को लेकर डर व्यापक है,
क्योंकि वे मानते हैं कि इससे उनके खिलाफ प्रतिशोध या नौकरी छूटने का खतरा हो सकता है।
शिक्षण स्तर पर प्रभाव
भर्ती प्रक्रिया में इन सारे अनियमितताओं का बड़ा असर शिक्षण गुणवत्ता पर हो रहा है। अच्छे शिक्षकों के भर्ती न होने और माहौल की नकारात्मकता की वजह से छात्रों को वैकल्पिक विषयों की कमी, परीक्षाओं और रिजल्ट में देरी, और बेहतर मेंटरिंग न मिलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा भी धीरे-धीरे प्रभावित हो रही है।
क्या समाधान संभव है?
इस घोटाले और भ्रष्टाचार के माहौल से बाहर निकलने के लिए दिल्ली
विश्वविद्यालय को भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता
लानी होगी। चयन समिति के सदस्यों के नियमित बदलाव, शिकायत प्रणाली
को मजबूत और सुरक्षित बनाना, और कर्मचारियों
पर हो रहे अनुचित व्यवहार को रोकने के लिए सख्त नियम लागू करना जरूरी है।
साथ ही, विश्वविद्यालय प्रशासन को भी इन
परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए सुधारात्मक कदम उठाने होंगे
ताकि भारतीय शिक्षा की इस प्रतिष्ठित संस्था की गरिमा बनी रहे।
निष्कर्ष
दिल्ली यूनिवर्सिटी में भर्ती घोटाला सिर्फ एक संस्थागत समस्या नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक भ्रष्टाचार
और भेदभाव को दर्शाता है। 50 लाख रुपये तक की रिश्वत की चर्चा इस घोटाले की गंभीरता को दिखाती है।
हालांकि इसे लेकर अभी तक ठोस प्रमाण नहीं सामने आए हैं, लेकिन अफवाहें और
अनुभव इस प्रक्रिया में गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं। सही कार्रवाई
और पारदर्शी व्यवस्था के बिना विश्वविद्यालय का भविष्य संकट में रहेगा।
इसीलिए इस मुद्दे पर खुली चर्चा और न्यायपूर्ण कार्रवाई समय की मांग है।






