इथियोपिया ज्वालामुखी का विस्फोट इथियोपिया के हैली गुब्बी ज्वालामुखी ने लगभग 10,000-12,000 साल की शांति तोड़ते हुए 2025 में अचानक जबरदस्त विस्फोट किया। इस विस्फोट से राख और सल्फर डाइऑक्साइड की मोटी परत 10-15 किलोमीटर ऊंचाई तक फैली, जो हवा की धाराओं के कारण अरब सागर, यमन, ओमान होते हुए भारत के उत्तरी हिस्सों तक पहुंची। राख के इस संक्रमण ने विमानन क्षेत्र में बड़े खतरों को जन्म दिया, जिसके कारण भारत की DGCA ने सभी एयरलाइंस को कड़े निर्देश जारी किए ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके। उड़ान रूटिंग में बदलाव, रनवे की सुरक्षा जांच और 24×7 सैटेलाइट निगरानी को बढ़ाया गया है। भूवैज्ञानिक और वैज्ञानिक इस अप्रत्याशित विस्फोट को क्षेत्रीय भूगर्भीय गतिविधियों की महत्वपूर्ण चेतावनी मान रहे हैं,

इथियोपिया ज्वालामुखी का विस्फोट: १०,००० वर्षों के बाद जागा प्राकृतिक दानव
२०२५ में, इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित हैली गुब्बी ज्वालामुखी ने करीब १०,००० से १२,००० वर्षों की लंबी शांति तोड़ते हुए जोरदार विस्फोट किया। यह विस्फोट न केवल वहाँ के लिए बल्कि पूरे अफ्रीका और भारत समेत दक्षिणी एशिया के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक घटना बन गया। विस्फोट के कारण राख और सल्फर डाइऑक्साइड का विशाल बादल १० से १५ किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला, जो हवा की तेज धारा के साथ अरब सागर, यमन, ओमान होते हुए भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों जैसे दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र तक पहुंच गया। इस राख बादल ने हवाई यातायात को गंभीर रूप से प्रभावित किया, जिससे भारतीय विमानन प्राधिकरण DGCA ने महत्वपूर्ण एयरलाइंस को राख वाले क्षेत्रों से उड़ानें टालने और वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने के निर्देश जारी किए।
हैली गुब्बी ज्वालामुखी और भूवैज्ञानिक महत्व
हैली गुब्बी ज्वालामुखी अफार त्रिभुज क्षेत्र में स्थित है, जहां तीन टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं।
यह क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से बेहद सक्रिय है, लेकिन हैली गुब्बी ज्वालामुखी करीब दस हज़ार वर्षों से निष्क्रिय था।
इसकी अचानक सक्रियता ने भूवैज्ञानिकों को पृथ्वी की आंतरिक प्लेटों के गतिशीलता और अफ्रीकी प्लेट की विभाजन
प्रक्रिया को समझने का अनूठा अवसर दिया। इस विस्फोट का अध्ययन वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है
क्योंकि इससे भविष्य में भू-tectonic घटनाओं का पूर्वानुमान बेहतर बनाया जा सकेगा।
राख बादल और विमानन सुरक्षा
विस्फोट से निकली राख ने ४५,००० फीट की ऊंचाई तक पहुंचकर वाणिज्यिक उड़ानों के लिए खतरा पैदा कर दिया। इसलिए DGCA और अन्य विमानन संस्थाओं ने एयरलाइंस को राख वाले मार्गों से बचने और उड़ान रूटिंग में बदलाव करने का आदेश दिया। उदाहरण के लिए, इंडिगो की उड़ान को अहमदाबाद से होकर डायवर्ट करना पड़ा। राख बादल को सैटेलाइट की मदद से लगातार ट्रैक किया जा रहा है ताकि उड़ानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। कई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स से उड़ानें स्थगित या डायवर्ट की गईं, जैसे कोच्चि, जेद्दा और दुबई।
पर्यावरणीय और स्वास्थ्य प्रभाव
इस राख बादल की उपस्थिति से वायु गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
राख के सूक्ष्म कण सांस लेने वालों के लिए हानिकारक हो सकते हैं
और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। इसलिए स्थानीय प्रशासन व वैज्ञानिक इस घटना के पर्यावरणीय
दुष्प्रभावों की निगरानी कर रहे हैं और स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों को लागू कर रहे हैं।
निष्कर्ष
इथियोपिया के हैली गुब्बी ज्वालामुखी का विस्फोट भूगर्भीय विज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है,
जिसके दूरगामी प्रभाव भारत सहित कई देशों में देखे जा रहे हैं। यह घटना न केवल प्रकृति की भू-tectonic गतिविधियों की ताकत
को दिखाती है, बल्कि हमारी सुरक्षा प्रणालियों और पर्यावरण जागरूकता की जरूरत को भी रेखांकित करती है।
इससे हमें भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति तैयार रहने और वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देने का सशक्त संदेश मिला है।







