शिंदे बनाम फडणवीस महाराष्ट्र निकाय चुनावों के बीच एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के बीच तीखा विवाद गहरा गया है, जहां शिंदे ने फडणवीस को ‘रावण’ और ‘बैड ब्वॉय’ कहा, तो फडणवीस ने पलटवार में ‘लंका जलाने’ की धमकी दी। यह टकराव महायुति गठबंधन में दरार पैदा कर रहा है, खासकर पालघर के डहाणू और ठाणे जैसे इलाकों में जहां दोनों पार्टियां आमने-सामने चुनाव लड़ रही हैं ।

महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के बीच तीखा विवाद छिड़ गया है। विधानसभा चुनाव में एकजुट होकर महायुति ने करारी जीत हासिल की थी, लेकिन अब निकाय चुनावों के मैदान में दोनों नेता आमने-सामने हैं। 2 दिसंबर को 246 नगर पालिकाओं और 42 नगर पंचायतों पर वोटिंग होनी है, जहां भाजपा और शिंदे शिवसेना कई सीटों पर भिड़ रही हैं। यह टकराव ‘राम-रावण’ की जंग तक पहुंच गया, जो गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर रहा है ।
विवाद की जड़ें: टिकट वितरण और दलबदल
निकाय चुनाव तीन चरणों में हो रहे हैं—पहला नगर पालिका-पंचायत, दूसरा जिला परिषद-पंचायत समिति, तीसरा बड़े निगम जैसे मुंबई-ठाणे। भाजपा ने शिंदे शिवसेना के कई नेताओं को अपने पाले में खींच लिया, खासकर ठाणे और पालघर में। डहाणू चेयरमैन पद पर सीधा मुकाबला हो रहा है। शिंदे गुट के मंत्री कैबिनेट बैठक का बहिष्कार कर चुके हैं। फडणवीस ने ठाणे में रवींद्र चव्हाण को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर और गणेश नाईक को संगठन जिम्मेदारी देकर शिंदे के गढ़ पर कब्जा जमाने की कोशिश की ।
शिंदे मुंबई-ठाणे का अपना जनाधार बचाना चाहते हैं, जबकि फडणवीस भाजपा का वर्चस्व बढ़ा रहे हैं। कल्याण-डोंबिवली में शिंदेसेना के नगरसेवकों के भाजपा में जाने से नाराजगी भड़की। शिंदे दिल्ली जाकर अमित शाह से मिले, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। यह सब विधानसभा चुनावी एकता के बाद चौंकाने वाला है ।
तीखे बयान: रामभक्त vs रावण
शिंदे ने फडणवीस को ‘रावण’ और ‘गुंडों का नेता’ कहते हुए चेतावनी दी कि 2 दिसंबर को ‘लंका जला देंगे’।
फडणवीस ने पलटवार किया, “हम राम भक्त हैं, लंका तो हम ही जलाएंगे।”
यह धार्मिक प्रतीकों वाली जुबानी जंग सोशल मीडिया और रैलियों में वायरल हो गई।
शिंदे ने भाजपा को ‘बैड ब्वॉय’ भी ठहराया। विपक्ष इसे महायुति की दरार बता रहा है ।
राजनीतिक निहितार्थ
यह विवाद महायुति (भाजपा, शिंदे शिवसेना, अजित पवार एनसीपी) को कमजोर कर सकता है।
288 सीटों पर सीधा टकराव से भाजपा को फायदा हो सकता है,
लेकिन शिंदे का ठाणे-मुंबई में पकड़ मजबूत रह सकता है। जिला परिषद (332 सीटें) और निगम चुनाव (29, जिसमें बीएमसी
शामिल) में तनाव बढ़ सकता है। चुनाव आयोग ने 31 जनवरी 2026 तक सब निपटाने का आदेश दिया है।
विपक्ष जैसे उद्धव ठाकरे शिवसेना (यूबीटी) को इससे लाभ मिल सकता है ।
कुल मिलाकर, यह सियासी ‘फ्रेंडली फाइट’ से कहीं आगे बढ़ चुका है।
शिंदे अपना अस्तित्व बचाने को बेताब हैं, वहीं फडणवीस सत्ता मजबूत कर रहे हैं।
निकाय चुनाव परिणाम महाराष्ट्र की भविष्य राजनीति तय करेंगे ।








