हिमंता बिस्वा सरमा : असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक बार फिर कांग्रेस के पुराने घाव को कुरेद दिया है। मंगलवार को विधानसभा में कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में हिमंता ने दावा किया कि साल 2014 में कांग्रेस के 58 विधायकों के समर्थन के बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें फोन कर असम का मुख्यमंत्री बनने के लिए शपथ ग्रहण की तारीख तय करने को कहा था। लेकिन राहुल गांधी के हस्तक्षेप से पूरी स्थिति पलट गई। यह खुलासा असम की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर सकता है। आइए जानते हैं इस पूरी घटना की डिटेल्स।
हिमंता बिस्वा सरमा 2014 में असम कांग्रेस में बगावत और हिमंता का दावा
2011 के विधानसभा चुनावों के बाद असम कांग्रेस में भारी असंतोष था। तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के खिलाफ कई विधायक खड़े हो गए थे। हिमंता बिस्वा सरमा, जो उस समय कांग्रेस के बड़े नेता थे और तरुण गोगोई के करीबी माने जाते थे, ने generational change की मांग की। उन्होंने दावा किया कि 58 कांग्रेस विधायकों ने उनका समर्थन किया था।

हिमंता ने कहा, “मैडम (सोनिया गांधी), जिन्हें मैं आज भी इसी तरह पुकारता हूं, ने मुझसे शपथ ग्रहण की तारीख तय करने को कहा। मैंने उन्हें बताया कि जून 2014 में कामाख्या मंदिर में अंबुबाची मेले के बाद शपथ लूंगा।” हिमंता के अनुसार, सोनिया गांधी ने उन्हें पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री बनाने की तैयारी दिखाई थी। लेकिन तब राहुल गांधी अमेरिका यात्रा पर थे। उनके फोन करने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। हिमंता ने कहा, “राहुल गांधी के फोन के बाद सब कुछ पलट गया।”
इस घटना के बाद हिमंता को बड़ा दुख हुआ, लेकिन उन्होंने इसे भगवान की मर्जी बताया। उन्होंने कहा, “तब मुझे दुख हुआ था, लेकिन अब मानता हूं कि जो होता है अच्छे के लिए होता है। कांग्रेस में रहता तो जो मिलता, भगवान ने उससे कहीं ज्यादा दिया। भाजपा में मुख्यमंत्री बनकर मुझे असम और सनातन धर्म की सेवा का पूरा मौका मिला, जो कांग्रेस में संभव नहीं था।”
हिमंता की कांग्रेस छोड़ने की कहानी
यह घटना 2014 की है, जब असम में कांग्रेस की सरकार थी। हिमंता ने 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली। 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत में हिमंता की अहम भूमिका रही। वे असम के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बन गए। हिमंता ने कहा कि अगर वे किताब लिखेंगे तो इन घटनाओं को विस्तार से बताएंगे।
- यह दावा घुलाम नबी आजाद की किताब से भी मेल खाता है, जहां उन्होंने लिखा था
- कि सोनिया गांधी ने हिमंता को सीएम बनाने की मंजूरी दी थी
- लेकिन राहुल गांधी ने रोका। आज भी असम कांग्रेस में हिमंता के खिलाफ नाराजगी है
- लेकिन वे लगातार कांग्रेस पर हमला बोलते रहते हैं।
राजनीतिक निहितार्थ क्या हैं!
- कांग्रेस के लिए झटका: यह खुलासा कांग्रेस हाईकमान की आंतरिक कलह को उजागर करता है।
- सोनिया गांधी vs राहुल गांधी की कहानी फिर से सुर्खियों में आ गई है।
- हिमंता की स्ट्रैटेजी: असम में अगले चुनावों से पहले हिमंता कांग्रेस को कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
- वे राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमले भी करते रहे हैं।
- असम की राजनीति: असम में भाजपा मजबूत है, लेकिन कांग्रेस अभी भी प्रयासरत है।
- ऐसे दावे कांग्रेस के पुराने समर्थकों को प्रभावित कर सकते हैं।
- हिमंता बिस्वा सरमा का यह बयान राजनीतिक बहस का नया विषय बन गया है।
- क्या यह कांग्रेस की कमजोरी दिखाता है या हिमंता की स्मार्ट पॉलिटिक्स?
- समय बताएगा। आप क्या सोचते हैं? कमेंट में जरूर बताएं!
Read More : Pigeon induction stove – सुरक्षित और तेज़ कुकिंग का स्मार्ट समाधान!









