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एयर प्यूरीफायर पर GST कम करने की याचिका का केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में किया विरोध, कहा- न्यायिक हस्तक्षेप असंवैधानिक

On: January 9, 2026 9:24 AM
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एयर प्यूरीफायर पर GST

एयर प्यूरीफायर पर GST : दर को 18% से घटाकर 5% करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) का केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कड़ा विरोध किया है। केंद्र का कहना है कि GST मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप संवैधानिक रूप से अनुचित है, क्योंकि यह शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करता है और GST काउंसिल के विशेष अधिकार क्षेत्र में दखल देता है। यह मामला दिल्ली की गंभीर वायु प्रदूषण समस्या से जुड़ा है, जहां एयर प्यूरीफायर को जरूरी स्वास्थ्य उपकरण मानकर टैक्स राहत की मांग की गई है।

9 जनवरी 2026 को प्रकाशित खबर के अनुसार, केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि कोर्ट GST दरों में बदलाव, GST काउंसिल की बैठक बुलाने या किसी विशेष निर्णय लेने का निर्देश नहीं दे सकता। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 279A के तहत GST काउंसिल के अधिकारों का अतिक्रमण होगा। केंद्र ने याचिका को “रंगीन और प्रेरित प्रयास” करार दिया, जो कुछ कंपनियों को व्यावसायिक लाभ पहुंचाने का माध्यम हो सकता है।

एयर प्यूरीफायर पर GST
एयर प्यूरीफायर पर GST

याचिका में क्या मांग की गई?

एडवोकेट कपिल मदान द्वारा दायर PIL में कहा गया है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण एक “अत्यधिक आपातकालीन संकट” है। एयर प्यूरीफायर को लग्जरी आइटम नहीं माना जा सकता। फरवरी 2020 की एक अधिसूचना के तहत इन्हें मेडिकल डिवाइस के रूप में वर्गीकृत किया गया है, इसलिए इन पर अन्य मेडिकल उपकरणों की तरह 5% GST लगना चाहिए, न कि 18%। याचिका में मांग की गई कि एयर प्यूरीफायर को सस्ता बनाने के लिए टैक्स कम किया जाए, ताकि आम आदमी इन्हें खरीद सके।

कोर्ट की पिछली टिप्पणियां

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले इस मामले में नाराजगी जताई थी कि प्रदूषण की गंभीर स्थिति
  • में एयर प्यूरीफायर पर टैक्स छूट क्यों नहीं दी जा रही। कोर्ट ने GST काउंसिल को जल्द बैठक बुलाकर टैक्स
  • कम करने या खत्म करने पर विचार करने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय
  • और न्यायमूर्ति तेजस करिया की बेंच ने केंद्र से पूछा था कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में खराब
  • हवा की स्थिति में एयर प्यूरीफायर को आम आदमी के लिए सस्ता क्यों नहीं किया जा सकता।
  • जब AQI “बहुत खराब” स्तर पर होता है, तो ऐसे में टैक्स छूट न देना समझ से परे है।

केंद्र के मुख्य तर्क

  • GST दरें और वर्गीकरण आर्थिक नीति का हिस्सा हैं, जिसमें कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
  • GST काउंसिल सहकारी संघवाद का प्रतीक है, और न्यायिक निर्देश इसे कमजोर करेंगे।
  • याचिका सार्वजनिक हित की बजाय कुछ निजी कंपनियों को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट
  • के तहत लाइसेंस देकर बाजार में एकाधिकार देने का प्रयास है।
  • केंद्र ने कहा: “कोर्ट GST काउंसिल की जगह नहीं ले सकता, वरना यह संवैधानिक संस्था को रबर स्टैंप बना देगा।”

दिल्ली प्रदूषण और एयर प्यूरीफायर की जरूरत

दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार है। सर्दियों में स्मॉग और खराब AQI के कारण श्वसन संबंधी बीमारियां बढ़ जाती हैं। एयर प्यूरीफायर इनडोर हवा को साफ रखने में मदद करते हैं, लेकिन ऊंची कीमत और 18% GST के कारण ये आम लोगों की पहुंच से दूर हैं। अगर GST 5% हो जाए, तो ये ज्यादा किफायती हो सकते हैं।

यह मामला 9 जनवरी 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। आगे का फैसला GST दरों और प्रदूषण नियंत्रण नीतियों पर असर डाल सकता है।

क्या बदलेगी GST दर?

  • फिलहाल केंद्र का रुख सख्त है, लेकिन कोर्ट की टिप्पणियां प्रदूषण की गंभीरता को रेखांकित करती हैं।
  • पर्यावरण प्रेमी और स्वास्थ्य विशेषज्ञ उम्मीद कर रहे हैं कि GST काउंसिल इस पर विचार करे।
  • अगर आप दिल्ली या प्रदूषित शहर में रहते हैं, तो एयर प्यूरीफायर खरीदने से पहले GST अपडेट चेक करें।

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