दिल्ली प्रदूषण स्तर दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति पर पहुंच गया है। शहर ‘गैस चैंबर’ में बदल चुका है और कई इलाकों में AQI बेहद खराब श्रेणी में दर्ज किया गया है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है।

#दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की स्थिति
इस हफ्ते केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 से 400
के बीच रिकॉर्ड किया गया, जो ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
कई क्षेत्रों में तो यह 400 पार करते हुए ‘Hazardous’ यानी खतरनाक स्तर पर दर्ज हुआ है
जैसे आनंद विहार, वजीरपुर, मुंडका, अक्षरधाम और बवाना।
नॉर्थ और सेंट्रल दिल्ली में स्थिति और भी गंभीर है; यहां कुछ जगहों पर AQI 334 तक पहुंच गया।
खराब हवा का लोगों पर असर
ऐसे हालत में दिल्लीवासियों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, गले में खराश, अस्थमा व फेफड़ों संबंधी
परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कई इंटरव्यू और वीडियो रिपोर्टों में लोग बताते हैं कि बच्चों और बुजुर्गों की तबियत ज़्यादा खराब हो रही है।
सुबह और शाम के समय धुंध की मोटी चादर दिल्ली को छुपाए रहती है, जिससे विजिबिलिटी बेहद कम हो गई है।
प्रदूषण के मुख्य स्रोत
दिल्ली में पिछली रात से हर सुबह तक धुंध और स्मॉग का स्तर बढ़ जाता है। इसके कई कारण हैं:
पड़ोसी राज्यों में पराली (stubble burning) जलाने की वजह से हानिकारक कण (PM2.5) में बहुत बढ़ोतरी हो जाती है।
वाहन से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्य, सड़क की धूल और फैक्ट्री का स्मोक भी
दिल्ली की हवा खराब करने में बड़ा योगदान देते हैं।
इस बार मौसम में लगातार बदलाव, ठंडी हवाएं और कम रफ्तार की वजह से भी प्रदूषित कण ज़मीन के पास ही रुके रहते हैं।
प्रशासन और सरकार की कोशिशें
सरकार की तरफ से कई कदम उठाए जा रहे हैं:
एंटी-स्मॉग गन और पानी का छिड़काव।
वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान/GRAP)।
कंस्ट्रक्शन पर रोक, स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टियाँ घोषित करना।
प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों को बंद करना।
फिर भी स्थानीय लोग और विशेषज्ञ मानते हैं कि ये उपाय नाकाफी हैं और स्थायी समाधान के
लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
लोगों की प्रतिक्रिया और रोजमर्रा की मुश्किलें
लोग मास्क पहनकर ही घर से निकल रहे हैं, खासकर बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग घरों में ही रह रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लोग हालत की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार प्रदूषित हवा में रहने से सिर्फ फेफड़े ही नहीं, बल्कि दिमाग पर भी असर हो सकता है,
जिससे डिमेंशिया और अल्ज़ाइमर जैसी बीमारियां भी बढ़ सकती हैं।
आगे की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, अगले छह दिनों तक हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ स्तर पर ही बने रहने के आसार हैं।
हवा तेज चलने या बारिश से ही कुछ राहत मिल सकती है।
निष्कर्ष
दिल्ली में इस समय प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक है और यह स्थिति हर दिल्लीवासी के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।
सभी को मिलकर, व्यक्तिगत और प्रशासनिक स्तर पर, प्रदूषण कम करने के प्रयास तेज करने होंगे –







