Arunachalam Temple: अरुणाचलम मंदिर की सम्पूर्ण गाइड कैसे पहुंचें और समय
Arunachalam Temple: अरुणाचलम मंदिर की सम्पूर्ण गाइड कैसे पहुंचें और समय
Arunachalam Temple: भारत में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं जो भक्तों के लिए आस्था और आध्यात्मिकता के प्रतीक हैं। इन्हीं में से एक है अरुणाचलम मंदिर, जिसे तिरुवन्नामलाई मंदिर भी कहा जाता है। यह तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई जिले में स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का महत्व विशेष रूप से कार्तिक पूर्णिमा और दीपम उत्सव के दौरान बढ़ जाता है।

मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
अरुणाचलम मंदिर भारत के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है।
कहा जाता है कि यह मंदिर लगभग 1000 वर्षों से भी अधिक पुराना है।
चोल, पांड्य और विजयनगर साम्राज्य के राजाओं ने इसे समय-समय पर पुनर्निर्मित करवाया।
मंदिर की वास्तुकला शानदार और भव्य है, जिसमें दक्षिण भारतीय शैली की झलक मिलती है।
भगवान शिव का अग्नि रूप
इस मंदिर में भगवान शिव को अरुणाचलेश्वर के रूप में पूजा जाता है,
जो पंचभूत तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) में से “अग्नि” तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं।
यहाँ भगवान शिव एक ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजे जाते हैं।
गिरीवलम (गिरिप्रदक्षिणा) का महत्व
अरुणाचलम मंदिर के चारों ओर अरुणाचल पहाड़ी स्थित है, जिसे शिव का ही रूप माना जाता है।
हर पूर्णिमा को हजारों भक्त इस पहाड़ी की 14 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करते हैं, जिसे गिरीवलम कहा जाता है।
मान्यता है कि इस परिक्रमा से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
दीपम उत्सव (कार्तिगई दीपम)
कार्तिक पूर्णिमा पर इस मंदिर में विशेष पर्व मनाया जाता है, जिसे कार्तिगई दीपम कहा जाता है।
इस दिन अरुणाचल पहाड़ी के शिखर पर एक विशाल दीप जलाया जाता है,
जिसे देखने के लिए लाखों श्रद्धालु आते हैं। इस अवसर पर पूरे शहर में दिवाली जैसा माहौल रहता है।
मंदिर की भव्य संरचना
अरुणाचलम मंदिर का गोपुरम (मुख्य द्वार) दक्षिण भारत के सबसे ऊँचे गोपुरमों में से एक है।
मंदिर परिसर में कई मण्डप, हॉल और जलकुंड हैं,
जो इसकी भव्यता को दर्शाते हैं। यहाँ विशेष रूप से रजगोपुरम, 1000 खंभों वाला हॉल और शिवगंगा तीर्थ प्रसिद्ध हैं।
कैसे पहुँचे अरुणाचलम मंदिर?
अरुणाचलम मंदिर तिरुवन्नामलाई शहर में स्थित है,
जो चेन्नई और बैंगलोर से सड़क मार्ग, रेल और बस से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
निकटतम हवाई अड्डा चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 180 किमी दूर है।
निष्कर्ष
अरुणाचलम मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव है।
यहाँ आने से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि आत्मिक ऊर्जा का भी संचार होता है।
यदि आप भगवान शिव के भक्त हैं या अध्यात्म में रुचि रखते हैं, तो यह स्थान आपके लिए अवश्य ही दर्शनीय है।
क्या आपने अरुणाचलम मंदिर की यात्रा की है? अपने अनुभव हमें कमेंट में बताएं!
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