भारत-ओमान FTA यह डील अफ्रीका और मध्य एशिया के लिए एंट्री गेट खुलेगी, जहां भारत जूते, कपड़े, ज्वेलरी, एग्रीकल्चर और नवीकरणीय ऊर्जा निर्यात बढ़ाएगा.
भारत और ओमान के बीच आज फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति देगा. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में यह डील साइन होगी, जिससे 10.5 अरब डॉलर के मौजूदा कारोबार में तेजी आएगी. ओमान खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) में भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, और यह समझौता जूते, कपड़े, ज्वेलरी, कृषि उत्पाद, वाहन कल-पुर्जे तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अवसर खोलेगा.

व्यापार संतुलन और प्रमुख वस्तुएं
भारत ओमान से 6 अरब डॉलर से अधिक का आयात करता है, जिसमें पेट्रोलियम और यूरिया का दबदबा है—ये आयात का 70% हिस्सा बनाते हैं. अन्य आयातों में प्रोपलीन, एथिलीन पॉलीमर, पेट कोक, जिप्सम, केमिकल्स, लोहा-इस्पात तथा अपरिष्कृत एल्यूमीनियम शामिल हैं. दूसरी ओर, भारत ओमान को 4 अरब डॉलर का निर्यात करता है, जिसमें खनिज ईधन, केमिकल्स, बहुमूल्य धातुएं, लोहा-इस्पात, अनाज, जहाज-नावें, विद्युत मशीनरी, बॉयलर, चाय, कॉफी, मसाले, वस्त्र तथा खाद्य पदार्थ प्रमुख हैं. यह डील व्यापार असंतुलन को सुधारने और निर्यात बढ़ाने में मदद करेगी.
अफ्रीका-मध्य एशिया के लिए गेटवे
गोयल ने इसे अफ्रीका और मध्य एशिया के लिए ‘एंट्री गेट’ बताया है,
क्योंकि ओमान की भौगोलिक स्थिति इन क्षेत्रों तक पहुंच आसान बनाएगी.
ओमान ने 20 सालों से FTA पर जोर दिया है—2006 में अमेरिका के साथ ऐसा ही समझौता किया था.
भारत के लिए यह रणनीतिक कदम है, जो GCC देशों से निर्यात बढ़ाएगा और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करेगा.
आर्थिक प्रभाव और भविष्य
यह FTA कारोबारियों के लिए नए द्वार खोलेगा,
खासकर MSMEs को लाभ मिलेगा. नवीकरणीय ऊर्जा और कृषि निर्यात में वृद्धि से रोजगार सृजन होगा।
कुल मिलाकर, यह डील भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और वैश्विक व्यापार रणनीति को मजबूत करेगी.
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