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पेट भरने तक को पैसे नहीं! गुलामी जैसी जिंदगी जीने को मजबूर भारत के 48 मजदूर

On: November 1, 2025 4:53 AM
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भारत के मजदूरों की

भारत के मजदूरों की हालत : पेट भरने जितने भी पैसे नहीं जुटा पाए 48 भारतीय मजदूर, मजबूरी में विदेश में गुलामी जैसी स्थितियों में जीने को विवश। जानें कैसे न्यूनतम मजदूरी, आर्थिक असुरक्षा और सरकारी प्रयासों के बाद भी भारतीय मजदूरों की हालत बदतर बनी हुई है।

भारत के मजदूरों की
भारत के मजदूरों की

प्रवासी भारतीय मजदूरों की स्थिति

हर साल लाखों भारतीय बेहतर रोजगार के लिए खाड़ी देशों या अफ्रीका जैसे हिस्सों में जाते हैं। कई बार स्थानीय कंपनियाँ इन्हें तयशुदा वेतन और सुविधाओं का वादा करती हैं, लेकिन बाद में पासपोर्ट जब्त कर लिया जाता है, वेतन रोक दिया जाता है और मजदूरों को बुरी हालत में रहने को मजबूर कर दिया जाता है। ट्यूनीशिया समेत कई देशों में मजदूर फर्जी एजेंट या ठेकेदार के झांसे में आकर फंस जाते हैं।

ट्यूनीशिया में 48 भारतीय मजदूरों की दर्दनाक दास्तां

झारखंड के गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग जिलों के मजदूर ट्यूनीशिया के एक प्लांट में कई महीने से बिना पैसे के काम करने को मजबूर हैं।

कंपनी ने वेतन रोक दिया है और मजदूरों ने वीडियो संदेश भेजकर भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। खाने के पैसे न होने से वे भुखमरी जैसी हालत में पहुँच गए हैं।

कफाला सिस्टम और प्रवासी शोषण

गulf देशों में लंबे समय से ‘कफाला सिस्टम’ लागू था,

जिसमें मजदूरों को नौकरी बदलने या देश छोड़ने के लिए अपने नियोक्ता की लिखित अनुमति लेनी पड़ती थी।

यह व्यवस्था शोषण और गुलामी जैसी स्थितियों को जन्म देती थी—पासपोर्ट जब्त करना, वेतन न देना, और अमानवीय चंगुल में रखना आम बात थी।

सऊदी अरब ने 2025 में कफाला सिस्टम समाप्त कर दिया है

, जिससे लगभग 25 लाख भारतीय मजदूरों को राहत मिल रही है।

अब वे स्वतंत्र रूप से नौकरी बदल सकते हैं, देश छोड़ सकते हैं

और अपने अधिकारों की कोर्ट में पैरवी कर सकते हैं।

सरकारी और सामाजिक पहल

झारखंड समेत कई प्रदेशों की सरकारें प्रवासी मजदूरों को बचाने

और उनके हक दिलाने के लिए कदम उठा रही हैं।

भारतीय दूतावास, सोशल एक्टिविस्ट और सरकार मिलकर

ऐसे मजदूरों की सुरक्षित वतन वापसी और बकाया वेतन की प्रबल कोशिशें कर रहे हैं।

सोशल कार्यकर्ता के मुताबिक, यह पहली

बार नहीं जब भारतीय मजदूर विदेश जाकर बुरी हालत में फँसे हों;

इससे पहले भी डिप्लोमैटिक हस्तक्षेप से कई मजदूरों को वतन वापस लाया गया है।

श्रमिकों के लिए सुझाव

  • किसी अन्य देश में जाने से पहले एजेंट के वेरिफिकेशन, कंपनी की प्रामाणिकता और कॉन्ट्रैक्ट की पूरी जानकारी लें।
  • विदेश मंत्रालय और श्रम मंत्रालय के रजिस्टर्ड एजेंट की ही सेवाएं लें।
  • फंसने की स्थिति में भारतीय दूतावास, हेल्पलाइन या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वीडियो संदेश के जरिये सहायता मांग सकते हैं।
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